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अनूप जलोटा के भजनों-गजलों से महका गंगा का किनारा

Varanasi Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। तुलसी घाट पर रविवार की शाम गंगा का उन्मुक्त किनारा भजन सम्राट अनूप जलोटा की सुर साधना का साक्षी बना। गीतों-गजलों, भजनों की ऐसी धारा बही कि चहुंदिशि तालियों की बौछार और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। इससे पहले पूरब अंग की गायकी का भी रंग खूब जमा। बनारसी ठुमरी, दादरा की प्रस्तुतियों पर लोग झूमते रहे। यह कार्यक्रम आइडिया जलसा की ओर से किया गया था।
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अनूप जलोटा को सुनने के लिए तमाम देशी-विदेशी संगीत रसिक घाट पर शाम को ही पहुंच गए थे। उन्होंने शुरुआत की अपने चिर परिचित भजन -ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन... से। इसके बाद तो फिजा ऐसी बनी कि तुलसी घाट पर ओर से छोर तक जमे लोग हर बोल पर अनूप का साथ देते नजर आने लगे। बिना रुके उन्होंने एक के बाद एक कुल आठ भजन पेश किए और भीड़ तालियां बजाती रही। तेरे मन में राम तन में राम.../पायो जी मैंने राम रतन धन पायो.../श्यामतेरी बंशी पुकारे राधा नाम.../कभी-कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े.../गोविंद जै जै गोपाल जै जे.. रंग दे चुनरिया...जैसे भजनों पर लोग थिरके-झूमते रहे।

बीच -बीच में अनूप जलोटा फिल्मी लटके-झटके लेकर श्रोताओं को गुदगुदाते-हंसाते भी रहे। हारमोनियम पर वह कभी तू चीज बड़ी है मस्त -मस्त की धुन छेड़ रहे थे तो कभी रमैया वस्तावैया... पर ठहाके लगवा रहे थे। गजल सम्राट जगजीत सिंह को भी उन्होंने याद किया। बोले कल ही तो उनका जन्म दिन था। इसलिए गजल की शुरुआत उन्हीं के बोल से करता हूं। फिर ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी ले लो ... पर तराना छेड़ दिया। अंतरा में उन्होंने जोड़ा कि-मगर मुझको लौटा दो जगजीत वो गजलें रुहानी वो शाम-ए-सुहानी...। इसके बाद राज इलाहाबादी की गजल -लज्जते गम बढ़ा दीजिए/आप फिर मुस्कुरा दीजिए... को स्वर देकर माहौल बदल दिया। तबले पर गिरिराज प्रकाश, गिटार पर धीरेंद्र रायचूरा और संतूर पर रोहन खत्री ने संगत की। इससे पहले बनारस घराने की गायकी में पूरब अंग के साथ मिठास घोली काकोली मुखर्जी ने। राग मिश्र काफी में ठुमरी से उन्होंने शुरुआत की। बोल थे नदिया धीरे बहो/ मोरे सैंया उतरेंगे पार...। काकोली मुखर्जी के साथ सारंगी पर संतोष मिश्र, तबले पर ने संजीत मुखर्जी संगत की। संचालन किया पं. जसराज की पुत्री दुर्गा जसराज ने। इस मौके पर पद्मभूषण पं.छन्नूलाल मिश्र, संकट मोचन मंदिर के छोटे महंत प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र, सांसद अमर सिंह समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
इनसेट
संतूर-गिटार पर सरगम की जुगलबंदी
वाराणसी। अनूप जलोटा ने संतूर और गिटार के साथ कई बार जुगलबंदी की। संतूर पर रोहन के साथ सरगम इस शर्त के साथ गाया कि अगर वह सटीक नहीं उतरे तो बनारस छोड़ जाउंगा।

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