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लोसर पर्व में शामिल होंगे करमापा

Varanasi Updated Sat, 09 Feb 2013 05:30 AM IST
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सारनाथ। तिब्बती परंपरा के नए साल लोसर पर्व में शामिल होने के लिए कर्जुद संप्रदाय के 17वें करमापा उग्येन थ्रिनले दोरजे शुक्रवार की देर शाम सारनाथ पहुंच गए। भगवान गौतम बुद्ध की तपस्थली पर वह महीने भर प्रवास करेंगे। शनिवार को उनके पहले अनुष्ठान की शुरुआत होगी महाकाल चक्रपूजा से।
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करमापा ने शाम करीब 5.52 पर वज्र विद्या संस्थान में प्रवेश किया। यहां पहले से हाथों में सुलगती अगरबत्ती और खाता लेकर कतारबद्ध खड़े बौद्ध भिक्षुओं ने उनका श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। इस दौरान तिब्बती लोक वाद्ययंत्र ज्ञालिन और रणतुंगा की मधुर ध्वनि गूंज रही थी। सफेद सफारी में बैठे करमापा हाथ हिलाकर भिक्षुओं का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। संस्थान परिसर में उनकी अगवानी केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति पद्मश्री गेसे नवांग समतेन ने खाता भेंट कर की। इस दौरान परंपरागत वेश में तमाम बौद्ध धर्मावलंबी और विदेशी श्रद्धालु करमापा का दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे थे। कुछ देर बाद वह मंदिर परिसर में बनी विशालकाय बौद्ध प्रतिमा के दर्शन को पहुंचे। वहां दीप प्रज्ज्वलित कर खाता अर्पित किया। इस मौके पर उनके आध्यात्मिक गुरु ठंगू रिनपोछे, प्रो. गेसे थपके, प्रो. रमेश चंद्र नेगी, सीआर लामा भी साथ थे। इसके बाद वह सीधे विश्राम कक्ष में चले गए। करमापा 11 फरवरी को लोसर पर्व में हिस्सा लेंगे। उनके प्रवास को देखते हुए वज्र विद्या संस्थान परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

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