छेड़खानी के खिलाफ साहित्यकार हुए लामबंद

Varanasi Updated Mon, 28 Jan 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में गुरुवार को हुई छेड़खानी के खिलाफ शहर के बुद्धिजीवी और साहित्यकारों ने भी मोर्चा खोल दिया है। रविवार को हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की गई। सोमवार को शाम चार बजे ख्यात कवि ज्ञानेंद्र पति की अध्यक्षता में अस्सी घाट पर बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों की बैठक बुलाई गई है। परिसर में जिन छात्राओं के साथ अभद्रता की गई है, उनमें से एक भोजपुरी के नामचीन कवि बलभद्र की पुत्री है। इस वजह से साहित्यकारों में गोलबंदी बढ़ी है।
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रचनाकारों और बुद्धिजीवियों की ओर से रविवार को जारी अपील में कहा गया है कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय भारतीय समाज का एक बड़ा सांस्कृतिक और ज्ञान केंद्र है। इसकी अंतरराष्ट्रीय गरिमा है। यहां पर 24 जनवरी 2013 को छात्राओं के साथ जिस तरह की अभद्र घटना हुई है उससे सभी चिंतित हैं। उनके प्रति की गई अश्लील टिप्पणियों एवं अपमानजनक आचरण की हम घोर निंदा करते हैं। इस कुकृत्य का साहसपूर्ण तरीके से प्रतिवाद करने वाले छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों की प्रशंसा करते हैं और उनके साथ हैं। जिला प्रशासन एवं विश्वविद्यालय प्रशासन से अपेक्षा है कि वे अवांछित तत्वों से शीघ्रातिशीघ्र परिसर को मुक्त कराते हुए भयमुक्त और सांस्कृतिक गरिमायम माहौल बनाए।

प्रगतिशील लेखक संघ के प्रांतीय महासचिव संजय श्रीवास्तव, भोजपुरी कवि प्रकाश उदय के नेतृत्व में एक टीम ने घर-घर जाकर बुद्धिजीवियों से इस पर हस्ताक्षर कराना शुरू किया है। जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष डा. रामसुधार सिंह, दयानिधि मिश्र, शालिनी श्रीवास्तव, चिकित्सक डा. राजेंद्र प्रसाद सिंह, डा. देव, डा. गोरखनाथ, आलोचक डा. निरंजन सहाय, बलदेव पीजी कालेज प्राचार्य डा. उदयन मिश्र, डा. सविता, डा. कृष्णमोहन, प्रो. राजकुमार, कवि डा. श्रीप्रकाश शुक्ल, डा. प्रशांत शुक्ल, मूलचंद्र सोनकर, जवाहर लाल कौल, अशोक आनंद ने इस पर दस्तखत किए हैं। संजय श्रीवास्तव ने बताया कि कथाकार डा. काशीनाथ सिंह और समालोचक प्रो. चौथीराम यादव ने भी समर्थन किया है। छेड़खानी करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय कुछ लोग विरोध में खडे़ होने वालों पर प्रहार किए जा रहे हैं। यह विचारधारा पर सुनियोजित हमला है। अस्सी घाट पर होने वाली बैठक में इस मामले को उठाया जाएगा।

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