Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi ›   दुखी हैं पर हौसले बुलंद

दुखी हैं पर हौसले बुलंद

Varanasi Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
वाराणसी। बीएचयू परिसर के विभिन्न हास्टलों में रहने वाली पांच हजार से अधिक छात्राओं में से एक बड़ा वर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। गुरुवार को परिसर में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के बाद बीएचयू प्रशासन और पुलिस की अकर्मण्यता के चलते वे भयभीत भी हैं। लंका थाने की पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने की जगह संरक्षण देने में जुटी रही। जिन तीन छात्राओं के साथ छेड़खानी की घटना हुई थी वे गुरुवार की रात सो नहीं पाईं। वे डरी सहमी हैं। उनके पास परिजनों, परिचितों और साथ के छात्र-छात्राओं के फोन रात भर आते रहे। इन छात्राओं के माता-पिता भी परिसर में अपनी बेटियों की सुरक्षा की गारंटी न पाकर हैरान-परेशान और दुखी हैं।

छेड़खानी की शिकार छात्राओं के हौसले बुलंद हैं कि उन्होंने जो साहस दिखाया उसके चलते ही छेेड़खानी की घटना सामने आई। साथ ही सहमी भी हैं। दुखी भी। दुख यह है कि उनके लिए अपना कैंपस सुरक्षित नहीं है। एक छात्रा ने तो अमर उजाला प्रतिनिधि से यह तक कह दिया कि जब पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने आरोपी रहा और कार्रवाई नहीं हुई तो कब होगी। यह बात दीगर है कि छात्राओं के मनोबल को बढ़ाने के लिए अन्य हास्टल में रहने वाली छात्राओं ने भी साथ देने का वचन दिया है। बड़ी तादाद में छात्र भी उनके साथ आ रहे हैं।

शुक्रवार को विश्वविद्यालय बंद था, लेकिन तीनों छात्राएं आपस में संपर्क में थीं। उनका कहना है कि 48 घंटे तक विश्वविद्यालय प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है तो इस मामले की शिकायत केंद्रीय और राज्य के गृह मंत्री तक से करेंगे। जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री से भी जाकर मिलेंगी। उनका कहना है कि छात्रों की आड़ में गुंडागर्दी करने वालों से डरेंगी नहीं, अपनी कक्षाओं में वैसे ही जाएंगी जैसे पहले जाती थीं।
उधर, गिरिडीह से एक छात्रा के पिता बलभद्र ने अमर उजाला को बताया कि जब बीएचयू परिसर में ऐसा माहौल है तो हम अपनी बेटियों को कैसे असुरक्षित छोड़ दें। रात भर नींद नहीं आई। छात्राओं की माताओं ने उन्हें ऐहतियात बरतने की सलाह दी है और कहा है कि वे समूह में जाएं, अकेली नहीं। लेकिन इस संबंध में विश्वविद्यालय के कई पुराने छात्रनेता भी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। बीएचयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रामइकबाल सिंह का तो यह कहना है कि वैचारिक और नैतिक गिरावट का यह परिणाम है। हमारा परिसर ऐसा नहीं था। इसे सुधारना ही पड़ेगा।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00