औसत से डेढ़ घंटे कम रहा शुक्रवार का दिन

Varanasi Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। रोजाना की अपेक्षा शुक्रवार का दिन एक घंटा 27 मिनट 11 सेकेंड कम रहा। बनारस में शुक्रवार को सबसे छोटी परछाई 11 बजकर 56 मिनट पर बनी। इसका अध्ययन बीएचयू में 26 दिसंबर से शुरू राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस में देश के विभिन्न हिस्सों से भाग लेने आए वैज्ञानिकाें ने विश्वविद्यालय परिसर में किया। प्रगति विज्ञान संस्था के बैनर तले अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकाें ने साल के सबसे छोटे दिन और पृथ्वी की परिधि के बारे में अध्ययन किया। प्रगति विज्ञान संस्था से जुड़े वैज्ञानिकाें ने इसका अध्ययन देश में एक साथ मेरठ, यमुनानगर, गाजियाबाद, भुज, श्रीनगर, बनारस और पुणे में किया।
संस्था के राष्ट्रीय समन्वयक दीपक शर्मा ने बताया कि 21 दिसंबर को बनारस के दिन के बारे में अध्ययन किया गया तो पाया गया कि शुक्रवार के दिन की अवधि 10 घंटा, 33 मिनट और 49 सेकेंड रही। वैज्ञानिकाें ने बीएचयू में सूरज की परछाई की मदद से पृथ्वी की परिधि का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि विश्व में सबसे छोटा दिन इग्लैंड में रहा, जहां 7 घंटा 51 मिनट का दिन पाया गया। सबसे बड़ा दिन आस्ट्रेलिया में 14 घंटा 19 मिनट का रहा। उन्होंने बताया कि बनारस में अध्ययन 25.270293 उत्तरी अक्षांश और 82.998147 पूर्वी देशांतर पर सुबह साढ़े 11 से एक बजे के बीच किया गया। 23 दिसंबर तक वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। वैज्ञानिकाें के अनुसार, 21 दिसंबर को सूर्य सबसे दक्षिणी छोर पर था। इसके बाद, उसकी स्थिति उत्तरायण होने लगती है। वैज्ञानिकों की टीम में एनसीएसटी नेटवर्क के राष्ट्रीय महासचिव आरएस रघुबंशी, कर्नाटक की श्रीमति हरिप्रसाद, केवीके मूर्ति, स्वप्निल शर्मा, सुबश्री, बृजेश कुमार, अजय शंकर आदि शामिल हैं।

कैसे किया गया अध्ययन
वैज्ञानिकाें ने पृथ्वी की परिधि के अध्ययन के लिए सूर्य की किरणाें का सहारा लिया। बीएचयू में 90 डिग्री पर एक सीधी छड़ी को खड़ाकर परछाई की माप की गई। 11 बजकर 56 मिनट पर छड़ी की सबसे छोटी परछाई बनी। इस आधार पर वैज्ञानिकाें ने दिन के घंटाें की गणना की।

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