‘बेटी बेचवा’ के सर्जक को किया गया याद

Varanasi Updated Wed, 19 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। भोजपुरी साहित्य की धरोहर कहे जाने वाले महान रचनाकार भिखारी ठाकुर की 126वीं जयंती मंगलवार को वर्ल्ड भोजपुरी आर्गनाइजेशन की ओर से मनाई गई। आदि केशव घाट पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने उन्हें भोजपुरी के शेक्सपीयर की संज्ञा देते हुए उनके साहित्य के अनुशीलन पर बल दिया।
18 दिसंबर 1887 को बिहार के सारण जिले के बुकुबपुरा गांव में जन्मे भिखारी ठाकुर ने विदेसिया, बिरहा बहार, बहरा बहार, गंगा असनान, नई बहार, भिखारी भजन माला, ननद भौजाई, गबर चिचोर, विधवा प्रलाप, बेटी वियोग, बेटी बेचवा, कलियुग प्रेम, पुत्र वधु, नकल भांड़ जैसी अनेकानेक कृतियों के माध्यम से भोजपुरी साहित्य को समृद्धि किया है। स्त्री विमर्श पर आधारित उनकी कहानियां, उनके नाटक जहां गहन मानवीय चेतना का प्रवाह करते हैं वहीं शृंगार रस प्रधान रचनाएं उनकी बहुमुखी प्रतिभा का द्योतक हैं। अपूर्व नारायण तिवारी की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में बृजमोहन प्रसाद, बाबा, लाल बाबू, बादल कुमार, बच्चेलाल, डा. एके. ओझा, अजय सिंह, सतीश श्रीवास्तव, राजेंद्र, अनिल जायसवाल, श्री राम यादव, घुरबटोर आदि उपस्थित रहे।

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