मात्र चार फीसदी लोग ही बीमा से आच्छादित

Varanasi Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। देश की जनसंख्या भले ही सवा अरब से अधिक हो गई हो, लेकिन अब भी मात्र चार फीसदी लोग ही सिंगल जीवन बीमा पालिसी से आच्छादित हैं। देश में 24 निजी बीमा कंपनियों के आने के बाद यह स्थिति है, जबकि इसके पहले मात्र 1.7 प्रतिशत लोग ही बीमा से आच्छादित थे।
यह जानकारी लाइफ इंश्योरेंस एजेंट्स आफ इंडिया के वाराणसी मंडल के अध्यक्ष पीएन सिंह ने दी। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने बताया कि एलआईसी 15 फीसदी लोगों को जीवन बीमा से कवर्ड करने का दावा करती हैं। इनमें मध्यम और उच्च परिवारों में लोगों ने चार से दस पालिसियां ले रखी हैं। लेकिन सिंगल प्रीमियम के हिसाब से देखा जाए और भारतीय बीमा नियामक प्राधिकरण के आंकड़ों की मानें तो यह संख्या महज चार फीसदी है। यही वजह है कि देश और विदेश की कंपनियों की निगाह भारत के बीमा क्षेत्र के कारोबार पर लगी हुई हैं।
नेशनल फेडरेशन आफ इंश्योरेंस फील्ड वर्कर्स आफ इंडिया के अध्यक्ष वीके सिंह ने बताया कि देश में मात्र 60 फीसदी लोगों को ही बीमा से कवर्ड किया जा सकता है, शेष को नहीं। देश में 40 फीसदी लोग ऐसे हैं जिन्हें जीवन बीमा पालिसी नहीं दी जा सकती। इनमें वे लोग हैं जो या तो गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं या फिर बेहद गरीब हैं। इसके अलावा बीमा कंपनियों के रोज बदलते नियम भी इस कारोबार पर असर डाल रहे हैं। नए एजेंटों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी काफी जटिल कर दी गई है। उन्होंने पालिसी बेचने में अभिकर्ताओं की भूमिका को अहम बताया।

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