जांच एजेंसियां किसी दबाव में न आएं : न्यायमूर्ति लोढ़ा

Varanasi Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा ने कहा कि विभिन्न जांच एजेंसियां खासकर सीबीआई, केंद्रीय सतर्कता आयोग तथा लोकायुक्त बिना किसी दबाव के निर्भीक होकर और निष्पक्ष जांच करें। भ्रष्टाचार तथा छोटी मोटी रिश्वत की घटनाएं भी विकास में बाधक हैं। भ्रष्टाचार न तो भारत की खोज रही है और न ही आधुनिक भारत का उत्पाद। भ्रष्टाचार से सबसे बड़ी क्षति यह है कि इससे लोकतंत्र में हमारा विश्वास समाप्त हो जाता है। वे शनिवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 34वें दीक्षांत समारोह में दीक्षांत भाषण कर रहे थे।
न्यायमूर्ति लोढ़ा ने विश्वविद्यालय के छात्रों को नैतिक जीवन जीने की सलाह देते हुए कहा कि हमेशा भ्रष्टाचार से दूर रहें और नैतिक जीवन अपनाएं। हमेशा ध्यान रखिए कि नैतिक जीवन अनैतिक संपत्ति से कहीं अधिक समृद्ध होता है। आर्थिक लाभ को ध्यान में न रखते हुए आगे बढ़ेंगे तो अंत में पैसा अपने आप आपके पास होगा। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी की गंभीर समस्या से आज नौजवान जूझ रहे हैं। इनके लिए रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने, बेरोजगारी को नियंत्रित व कम करने के लिए समग्र सुनियोजित कार्यक्रम बनाए जाने की जरूरत है। साथ ही योजनाकारों को उन अवसरों को चिह्नित करना होगा जो स्व रोजगार पैदा कर सकें। कहा कि भविष्य का निर्माण आपके अपने हाथों में है। बड़े सपने देखेंगे तो बड़ी उपलब्धियां भी हासिल होंगी। उन्होंने कहा कि डिग्रीधारकों को चाहिए कि वो हमेशा संविधान के अनुच्छेद 51(अ) के अंतर्गत मौलिक कर्तव्योें से निर्देशित होते हुए उनके अनुरूप ही आचरण करें। मीडिया साहस, साख और सच्चाई के साथ कवरेज करे।
अध्यक्षता कर रहे कुलाधिपति एवं राज्यपाल बीएल जोशी ने कहा कि सामाजिक वैचारिकी का काशी विद्यापीठ केंद्र रहा है। वर्तमान परिस्थितियों और संदर्भों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय से यह स्वाभाविक अपेक्षा है कि वह समाज विज्ञान, विज्ञान एवं तकनीकी विषयों को समन्वित कर उच्च शिक्षा और सामाजिक विकास का नया मॉडल प्रस्तुत करे। शिक्षा के अवसर को निचले स्तर तक पहुंचाने तथा विकासोन्मुखी शिक्षा के सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रकार के मॉडल की नितांत आवश्यकता है। आज के वैश्विक परिदृश्य में शिक्षकों की भूमिका भी पूर्व की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण, बहुआयामी तथा वैविध्यपूर्ण हो गई है। इसका ख्याल रखना होगा। कहा कि विद्यापीठ महात्मा गांधी के सपनों का विश्वविद्यालय है। युवा पीढ़ी के लिए गांधी की प्रासंगिकता इसलिए भी है कि वे युवा पीढ़ी को भावी भारत की प्रगति की धुरी मानते थे। विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यहां आपको जो ज्ञान की किरणें प्राप्त हुई हैं, उनसे स्वयं दीप्त होकर पूरे समाज के अभाव और अज्ञान के अंधकार को दूर करने में आप समर्पित हों। स्वागत भाषण कुलपति डा. पृथ्वीश नाग ने दिया। संचालन प्रो. सतीश राय और धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव साहब लाल मौर्य ने किया।

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