पुलिस यातना से पीडि़त छाया ने सुनाई अपनी दुख भरी दास्तां

Varanasi Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। केस एक-मैं पांच सितंबर 2011 की वो सुबह कभी नहीं भूल सकती, जब पुलिस की यातनाओं से तंग मेरे पति ने जहर खाकर जान दे दी और मुझे व मेरे बच्चों को बेसहारा छोड़ दिया। पुलिस मुझेेे और मेरे पति को झूठे आरोप में फंसाना चाह रही थी। पुलिस ऐसा करती भी क्यों नहीं, दूसरे पक्ष से उन्हें मोटी रकम जो मिल गई थी। पुलिस ने मेरे पति को ही नहीं मेरे पूरे परिवार को मार डाला। अब तो बच्चों की चिंता है। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और अधिकारियों द्वारा 20 हजार रुपये देने की घोषणा भी अब तक पूरी नहीं हुई।-छाया यादव, महेशपुर, मंडुवाडीह
केस दो- 17 अक्तूबर 2012 की सुबह बड़ागांव पुलिस ने हमारी झोपड़ी में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। भद्दी भद्दी गालियां और चोरी का इलजाम लगाकर थाने लेकर चली गई। उनसे कुछ पूछना चाहा तो गालियां दीं और मारने की धमकी भी।’ बड़ागांव कोईरीपुर बस्ती के कल्लू मुसहर ने अपनी ये दर्द भरी आपबीती सुनाई। इसी घटना की पीडि़त चंद्रावती देवी ने बताया कि ‘पुलिस ने उनके घर भी जमकर तांडव किया था। तलाशी के नाम पर पूरा घर उजाड़ दिया। मेरे पति सीमर मुसहर को पुलिस जबरदस्ती थाने लेकर चली गई। जब मैं थाने पहुंची तो पुलिस ने मुझे भगा दिया। पति तो छूट गए लेकिन डर लगा रहता है। चोरी कोई और करता है और पुलिस हमें झूठे मुकदमे में फंसाती है।
केस तीन-जौनपुर के टिंकू मुसहर का किस्सा तो और भयावह है। टिंकू ने बताया कि ‘कई महीनोें तक गाजीपुर में भट्ठा मालिक ने उसे और उसके परिवार को बंधुआ मजदूर बनाकर रखा था। मजदूरी तो करते थे लेकिन रोज मालिक मारता था। खाना भी नहीं देता था। एक दिन किसी तरह वहां से भागने में कामयाब हो गया लेकिन डर लगा रहता था। डर सही साबित हुआ और एक दिन पुलिस की मदद से भट्टा मालिक ने दोबारा हमें पकड़ लिया। हम फिर से बंधुआ मजदूर बन गए। बड़ी मशक्कतों के बाद एक बार फिर से भागने में कामयाब हुआ। इस बार तो एक स्वयंसेवी संगठन की मदद से भट्टा मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहा हूं। आशा है जीत जाऊंगा।’
शुक्रवार को ऐसे ही अपनी दर्द भरी कहानी को पीडि़तों ने लोगों के सामने रखा। पीडि़तों में शामिल जियाउर्रहमान और निराजुद्दीन ने भी अपना दर्द साझा किया। अपने संघर्षों की कहानी को भी इन्होंने लोगों से बांटा। संघर्षों से लड़ते हुए दोबारा अपनी गरिमा और अस्मिता बनाने के प्रेरक बने। इन सभी पीडि़तों को मानवाधिकार जन निगरानी समिति और यूरोपियन यूनियन व डिग्निटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में सम्मानित किया गया। इसमें पीडि़तों को सामाजिक न्याय के लिए किए जाने वाले प्रयासों और मानव अधिकार संरक्षण व संवर्द्धन के तरीके बताए गए। संचालन अनूप कुमार श्रीवास्तव और धन्यवाद ज्ञापन शीरीन ने किया।

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