सार्वजनिक बैंकों का निजीकरण देशहित में नहीं

Varanasi Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। बैंकिंग रेग्युुलेशन एक्ट में बदलाव कर सार्वजनिक बैंकों को निजीकरण की ओर ले जाने की कवायद तेज हो गई है। बदलाव आने से सार्वजनिक बैंकों के बोर्ड आफ डायरेक्टर में बाहरी लोगों की संख्या बढ़ जाएगी। यह देश और ग्राहक हित में नहीं है। सभी बैंकों के संगठन इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को बिल पेश हुआ तो बैंक एसोसिएशन ने प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया। ये बातें आल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक आफीसर्स एसोसिएशन के महासचिव दिलीप साहा ने शनिवार को जगतगंज स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि पिछले दस सालों में बैंक का कारोबार बढ़कर दस गुना हो गया है। जबकि अधिकारियों की संख्या पहले के बराबर 20 हजार ही है। बैंक अधिकारियों का वेतन सरकारी विभागों के अधिकारियों से कम है। जबकि 1973 में उनका वेतन आईएएस अफसरों से अधिक था। कहा कि पिछले दो तिमाही के परिणाम में लगभग सभी बैंकों का एनपीए बढ़ा है। इसको हरहाल में कम किया जाए। रिटेल क्षेत्र में एफडीआई का सीधा असर बैंक पर नहीं पड़ेगा। लेकिन जब खुदरा क्षेत्र प्रभावित होगा तो उसका असर बैंक के कारोबार पर भी पड़ेगा। अधिकारियों की स्थानीय समस्याओं पर मंडल प्रमुख विवेक झा से बातचीत की गई। बातचीत के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारी अमिताभ भौमिक, अजय जेटली, कपिल मिश्रा आदि पदाधिकारी शामिल थे।

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