तालाब पाटकर बना दिया आलीशान स्कूल

Varanasi Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। लहरतारा में एक आलीशान स्कूल प्रचीन च्वायनेश्वर तीर्थकुंड को पाटकर बनाया गया है। तीर्थकुंड को आबादी की जमीन बताकर सट्टा करा लिया गया था। प्रशासन की जांच में खुलासा हुआ है कि वहां आबादी नहीं थी बल्कि तालाब था। तालाब पाटकर स्कूल बनाया गया है। जांच पूरी करने के बाद एसडीएम ने इस भूखंड को तालाब के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया था। उनके आदेश पर खतौनी में यह जमीन तालाब के रूप में दर्ज कर दी गई है।
तालाब पाटकर स्कूल बनाए जाने की शिकायत मिलने पर डीएम ने इसकी जांच कराई। तत्कालीन मुख्य राजस्व अधिकारी श्रीकृष्ण ने 25 नवंबर 2009 को डीएम को जांच रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में लिखा गया था कि धिराजी देवी ने तीर्थकुंड को अपना बताते हुए 1996 में 17 लाख रुपये में दीपक मधोक को सट्टा किया था। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि दीपक मधोक ने 16 नवंबर 1996 को आयुक्त को प्रार्थना पत्र लिखा था कि धिराजी देवी ने उन्हें कब्जा दिला दिया है। सट्टे के बाद मधोक की ओर से तालाब को पाटा जा रहा था। इसी बीच मिट्टी लदे ट्रकों को सिगरा पुलिस ने पकड़ लिया। इससे स्पष्ट है कि तालाब पाटकर भूमि का स्वरूप बदला गया। इसी प्रकार खसरा नं. 1359,1403 एवं धिराजी देवी के इकरारनामा एवं दीपक मधोक के प्रार्थना पत्र से स्पष्ट है कि भूखंड तालाब की प्रकृति में था जिसे पाटकर स्कूल बनवाया गया है। तत्कालीन नगर आयुक्त लालजी राय ने भी अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि तालाब पाट कर दीपक मधोक ने स्कूल बनवाया है।
बाद में इस मामले की जांच एसडीएम सदर को सौंपी गई। धिराजी देवी बनाम सरकार का मुकदमा भी चल रहा था। एसडीएम सदर ने 26 नवंबर 2012 को अपने आदेश में लिखा कि वाद में कोई भी पक्षकार नियत तिथियों पर उपस्थित नहीं हुआ। पत्रावली और अभिलेखों से स्पष्ट है कि आराजी नंबर 145/1 रकबा 0.028 हेक्टेयर, 146/1 रकबा 0.255 और 148/1 रकबा 0.512 स्थित ग्राम लहरतारा में रहे। इस न्यायालय के आदेश दिनांक 10 जुलाई 2002 से इसे आबादी घोषित कर दिया गया। परंतु ये तीनों भूखंड खसरा 1359 और 1403 में पोखरी के रूप में अंकित हैं। सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था है कि तालाब और पोखरी की नवैयत नहीं बदली जा सकती। पूर्व के अधिकारी के समक्ष तथ्य को छिपाकर भूमि का सट्टा किया गया। एसडीएम ने 10 जुलाई 2002 के आदेश को निरस्त करने का आदेश दिया। आदेश के बाद पांच दिसंबर को खतौनी में ये तीनों भूखंड तालाब के रूप में दर्ज कर लिए गए।

2002 के आदेश को रद कर भूखंड को तालाब के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।- एके शुक्ला, एसडीएम सदर और जांच अधिकारी

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