बीएचयू में फिर करोड़ाें का गड़बड़झाला

Varanasi Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में वर्ष 2011 की आडिट में करोड़ाें रुपये के गड़बड़झाला का मामला अभी चल ही रहा था कि कैग ने 2012 में भी 12 करोड़ 30 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता उजागर कर विश्वविद्यालय के अधिकारियाें को सकते में डाल दिया है। कैग ने आडिट रिपोर्ट केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को भेज दी है।
कैग ने 20 जून से 24 अगस्त तक बीएचयू के विभिन्न विभागाें की आडिट की थी। रिपोर्ट के भाग दो (क) में कहा गया है कि सर सुंदर लाल अस्पताल में माड्यूलर ओटी के निर्माण के लिए 6.40 लाख रुपये की प्रस्तावित लागत बताकर टेंडर निकाला गया था। इसके बाद नई दिल्ली की दो कंपनियां एमडीडी और पीईएस ने प्रथम बार निकाली गई निविदा में ही टेंडर फार्म भर दिए क्याेंकि प्रस्तावित राशि काफी कम थी। दूसरे टेंडर में मानक की अनदेखी करते हुए इन कंपनियाें को 27 मार्च 2012 को काम करने की अनुमति भी दे दी गई। टेंडर फाइनल करने में तत्कालीन आईएमएस निदेशक प्रो. टीएम महापात्रा और अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. यूएस द्विवेदी की भूमिका मुख्य मानी गई। इसी प्रकार अस्पताल परिसर में पीपीपी मॉडल पर स्थापित सिटी स्कैन सेंटर में बीएचयू का शेयर 30 से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया। ऐसा करने से 87.52 लाख का घाटा उठाना पड़ा।
कैग रिपोर्ट के भाग दो (अ) में कहा गया है कि आईआईटी के स्कूल आफ साइंस एंड टेक्नालाजी विभाग के न्यू ब्लाक भवन के निर्माण का कार्य सोनभद्र की एचएससीएल कंपनी को 20 मार्च 2010 को दिया गया था। भवन के लिए उपयुक्त जगह न होने और गलत ड्राइंग के कारण 20.31 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट के भाग दो (ब) में कहा गया है कि सर सुंदरलाल अस्पताल में बिना टेंडर प्रक्रिया के ही रीवा गैस प्राइवेट लिमिटेड, वैधान एवं मेसर्स बीओसी इंडिया लिमिटेड ऐशबाग, लखनऊ से 2011-12 में 50.34 लाख रुपये की आक्सीजन गैस की खरीदारी की गई।
बता दें कि माड्यूलर ओटी के टेंडर पर ‘अमर उजाला’ ने 11 जुलाई 2012 को ‘दागी कंपनी को दिया ठेका’ नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसका जिक्र कैग ने भी अपनी रिपोर्ट में किया है।
कोट :-
कैग रिपोर्ट की जानकारी मुझे नहीं है। कैग ने विश्वविद्यालय के किन- किन विभागाें में अनियमितता पकड़ी है, इसकी जानकारी रिपोर्ट देखकर या अधीनस्थाें से बातचीत करने पर ही हो सकेगी। वैसे भी यह मेरे समय का मामला नहीं है।- प्रो. जीएस यादव, कुलसचिव, बीएचयू

कैग ने कहां- कहां पकड़ी गड़बड़ी:

- मानक की अनदेखी कर बीएचयू अस्पताल में 6.40 लाख रुपये के माड्यूलर ओटी का टेंडर एक कंपनी विशेष को दिया गया
- बीएचयू अस्पताल में बिना टेंडर प्रक्रिया के 50.34 लाख की आक्सीजन गैस की खरीदारी की गई
- पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत संचालित सीटी स्कैन सेंटर में बीएचयू का शेयर कम करने से 87.52 लाख का घाटा हुआ
- आईएमएस के पैथालाजी विभाग एवं प्रेस व प्रिंटिंग विभाग में एक निजी फर्म के साथ अनुबंध के अनुसार 19.62 लाख का अधिक भुगतान हुआ
- डीएसटी सेंटर में निर्धारित व्यय सीमा से 211.60 लाख अधिक खर्च किया गया
- स्कूल आफ साइंस एंड टेक्नालाजी में गलत ड्राइंग पर निर्माण कार्य कराने से 20.30 लाख का नुकसान हुआ
- आईआईटी के धातुकीय अभियांत्रिकी विभाग में संयंत्र व उपकरणाें की खरीदारी में 85.50 लाख की क्षति उठानी पड़ी
- आवंटित आवासाें से 37.16 लाख रुपये लाइसेंस फीस कम वसूल की गई
- कृषि विज्ञान संस्थान में आईसीएआर द्वारा आवंटित राशि में से 42.99 लाख का अधिक का भुगतान यूडब्लूडी को किया गया
- कृषि विज्ञान संस्थान के डेयरी फार्म में बिना टेंडर के 15.57 लाख रुपये की पशु आहार सामग्री खरीदी गई

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