पानी के आर्सेनिक से निजात दिलाएगी नैनो तकनीक

Varanasi Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। जीरो वेलेटायन से पानी में मौजूद आर्सेनिक से शत-प्रतिशत छुटकारा पाया जा सकता है। यह आर्सेनिक को अपनी ओर चुंबक की तरह खींच लेगा। इस नैनो तकनीक के इस्तेमाल से गंगा किनारे रहने वाले उन लोगों को बेहद फायदा होगा जो पानी में घुले आर्सेनिक के चलते किडनी और लीवर की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। इस तकनीक के बारे में इंस्टीट्यूट आफ लाइफ साइंस गुजरात के निदेशक प्रो. आलोक धवन ने शुक्रवार को बीएचयू में शुरू हुई तीन दिनी राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के सम्मेलन में विस्तार से बताया।
प्रो. धवन ने कहा कि वाटर प्यूरीफायर से आर्सेनिक पूरी तरह पानी से निकल नहीं पाता। पर जीरो वेलेटायन तकनीक से शत-प्रतिशत आर्सेनिक और अन्य हानिकारक तत्वाें को पानी से निकाला जा सकता है। इस तकनीक का इस्तेमाल अमेरिका के कुछ संस्थानों में किया जा रहा है। अपने देश में भी यह तकनीक आम लोगों तक पहुंचाने पर काम चल रहा है।
बता दें कि बीएचयू और एक निजी अस्पताल द्वारा 2009 में किए गए शोध में पाया गया था कि मिर्जापुर से बलिया तक गंगा के किनारे स्थित 220 गांवाें में पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने से लोग किडनी और लीवर की बीमारियाें से ग्रसित थे।
इनसेट-
टूटी हड्डी में नहीं लगेगा राड
वाराणसी। नेशनल मेटलर्जिकल लेबोरेटरी (एनएमएल), जमशेदपुर ने एक ऐसा नैनो फ्लूइड विकसित किया है जिससे कैंसरग्रस्त सेल की आसानी से पहचान हो सकेगी। एनएमएल के वैज्ञानिक डा. अरविंद सिन्हा ने बताया कि देश में चार प्रयोगशालाआें में परीक्षण के बाद अब इसे अस्पतालाें में इस्तेमाल करने की अनुमति प्रदान कर दी गई है। इस नैनो फ्लूइड हाइड्राक्सी एपाटाइट से टूटी हुई हड्डियां भी प्राकृतिक रूप से विकसित हो जाएंगी। इससे राड डालने की जरूरत नहीं होगी। टूटी हुई हड्डियां छह से 18 सप्ताह में मूल स्वरूप में आ जाएंगी। हाइड्राक्सी एपाटाइट नैनो पाउडर और इंजेक्शन दोनाें रूप में उपलब्ध है।

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