बीएचयू में वित्तीय गड़बड़ी उजागर होने पर छात्रों ने पुतला फूंका

Varanasi Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। बीएचयू में करोड़ों का गड़बड़झाला उजागर होने और छात्रसंघ बहाली संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे देने से इंकार किए जाने पर शुक्रवार को छात्राें ने लंका चौराहे पर कुलपति का पुतला फूंका। छात्रनेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि तीन दिन के अंदर वित्तीय अनियमितता में लिप्त अधिकारियाें पर कार्रवाई नहीं की गई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। छात्रनेता विकास यादव और छात्र परिषद के पूर्व महासचिव विकास सिंह के नेतृत्व में छात्राें ने कुलपति के पुतले जलाए। इस दौरान छात्राें ने अमर उजाला में प्रकाशित ‘बीएचयू में करोड़ों का गड़बड़झाला’ खबर पर अखबार की प्रतियां हवा में लहराई।
दोपहर में छात्रसंघ बहाली के लिए याचिका दायर करने वाले विकास यादव और प्रवीण कुमार सिंह के वकीलाें ने जैसे की सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सूचना उन्हें दी, विश्वविद्यालय में जश्न का माहौल हो गया। सुबह अमर उजाला में प्रकाशित बीएचयू में वित्तीय अनियमितता की खबर पढ़कर छात्र काफी गुस्से में थे। जुलूस और आंदोलन के लिए छात्रावासाें में छात्र एकत्रित होने लगेे। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सुनकर वे खुशी से उछल पड़े। छात्रों को अब विश्वास हो गया है कि कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आने वाला है। पुतला दहन करने वालाें में छात्र परिषद के पूर्व खेल सचिव जगन्नाथ मिश्र, अखिलेश सिंह, प्रशांत मुखर्जी, श्वेतांक, मनीष, आनंद, मयंक, उत्कर्ष, अमरेंद्र, सौरभ, सुशांत, आशीष, दीपक, अंकित, अभिषेक, शशिकांत आदि समेत काफी संख्या में छात्र शामिल थे।

इनसेट:
शोध प्रवेश के लिए साक्षात्कार में धांधली का आरोप
वाराणसी। कैग रिपोर्ट में 2011 में बीएचयू के आडिट में करोड़ की अनियमितता पकड़ने जाने का मामला प्रकाश में आने पर छात्र परिषद के पूर्व महासचिव विकास सिंह ने 29 अक्तूबर को शोध में प्रवेश के लिए धांधली का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। छात्रनेता ने अपने बयान में कहा कि 29 और 30 अक्तूबर को हुए साक्षात्कार में शिक्षा संकाय के तीन प्रोफेसराें ने अपने परिजनाें को प्रवेश दिलाया है। इसी प्रकार, हिंदी विभाग में एक प्रोफेसर ने अपने पुत्र, एक लाइब्रेरियन ने अपनी पुत्री को साक्षात्कार में पैरवी कर शोध में प्रवेश दिलाया। इसके अलावा, नेपाल अध्ययन केंद्र, राजनीति विज्ञान और मनोविज्ञान में भी शिक्षकों ने अपने परिजनाें को प्रवेश दिलाई है। छात्रनेता का आरोप है कि शोध प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार में यूजीसी के मानक की अनदेखी की गई है और इसकी जांच होनी चाहिए।

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