काशी में षष्ठपीठ के उत्तराधिकारी की शाही शादी

Varanasi Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। पुष्टिमार्गी परंपरा के प्रमुख केंद्र षष्ठपीठ गोपाल मंदिर के इतिहास में पहली बार शादी अंदाज में होने वाली शादी देश भर के वैष्णवों के लिए यादगार बनेगी। इस पीठ की हवेली में अबतक किसी पीठाधीश्वर के उत्तराधिकारी और उनकी वल्लभा बेटी का लाल जोड़ा कभी एक साथ नहीं सजा था। जीवनलाल महाराज की हवेली के नौबतखाने में शहनाई की मंगलध्वनि के साथ शादी की बधाई बज उठी है। नायाब ढंग से होने वाली इस शादी के रस्म-रिवाज में चारों प्रमुख शंकराचार्य पीठों के प्रतिनिधियों के अलावा पांच देशों से मेहमान शामिल होंगे।
चौखंभा स्थित गोपाल मंदिर में करीब 476 साल बाद षष्ठपीठाधिपति के उत्तराधिकारी के रूप में गोस्वमी प्रियेंदु बावा और उनकी बहन रूप मंजरी बेटीजी की शादी के लिए 34 समितियों का गठन किया गया है। गोपाल मंदिर से टाउनहाल के बीच पांच दिसंबर तक बजने वाले बधाई उत्सव की शुरुआत 21 नवंबर से ही हो चुकी है। देश-दुनिया के 26 शहरों में विवाह प्रस्ताव की सेवा में शामिल होने के निमित्त दफ्तर खोले गए हैं। नाथद्वारा से कोटा के बीच पुष्टिमार्गी परंपरा सभी सातों पीठों के पीठाधीश्वरों के अलावा देश के प्रमुख मंदिरों के महंत खास तौर से षष्ठ पीठाधीश्वर की हवेली में होने वाले बड़ा मनोरथ के मौके पर मौजूद रहेंगे। बेटीजी मुंबई के बड़ा मंदिर स्थित नित्यलीला गोस्वामी माधव राय जी महाराज के दौहित्र मृगांग के साथ 28 नवंबर को सात फेरे लेंगी, जबकि प्रियेंदु बाबा की शादी 29 नवंबर को मध्यप्रदेश के पन्ना की मधु-राकेश की पुत्री विधि से होगी। अमेरिका, इंग्लैंड, दुबई, मसकट, बहरीन से पुष्टिमार्गी परंपरा के वैष्णव इस शादी में हिस्सा लेंगे। फिलहाल देश भर से आने वाले करीब 10 हजार वैष्णवों के ठहरने के लिए स्वामी नारायण मंदिर, जैन मंदिर, विश्सू जी का मंदिर, बेरी वाला धर्मशाला समेत आठ अतिथि गृहों को बुक करा लिया गया है। इस परंपरा से जुड़े गृहस्थों के भवनों में ठहरने के प्रबंध होंगे अलग से। अतिथियों के मनोरंजन के लिए डांडिया, गरबा, शास्त्रीय संगीत, उप शास्त्रीय संगीत की अलग-अलग स्थानों पर महफिलें होंगी।

प्वाइंटर
26 शहरों में विवाह की भेंट के लिए खोले गए कार्यालय
10 हजार से अधिक बाहर से आने वाले वैष्णवों के ठहरने के इंतजाम
34 समितियों की निगरानी में होंगी विवाह की रस्में

-डांडिया, गरबा नृत्य के अलावा सजेंगी शास्त्रीय-उपशास्त्रीय संगीत की सजेंगी महफिलें
कोट
शादी वैदिक रीति-रिवाज से पुष्टिमार्गी परंपरा के तहत होगी। गौचारण, रथ, हिंडोला, मंडप, प्रबोधनी उत्सव, रंग महल, ब्याहुला, शरद, मोती का बंगला, चीर हरण, हाथी दांत का पालना, पीत श्याम घटा, गणगौर, पालना के मनोरथ खास होंगे। -अरुण पारिख , मंत्री-श्री छप्पन भोग एवं संस्कार प्रस्ताल समिति षष्ठपीठ गोपाल मंदिर।

Spotlight

Most Read

Chandigarh

RLA चंडीगढ़ में फिर गलने लगी दलालों की दाल, ऐसे फांस रहे शिकार

रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) सेक्टर-17 में एक बार फिर दलाल सक्रिय हो गए हैं, जो तरह-तरह के तरीकों से शिकार को फांस रहे हैं।

21 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: श्रीलंका का ये सांस्कृतिक नृत्य देख कर झूम उठेंगे आप

बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के पंडित ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में गुरुवार की शाम श्रीलंकाई कलाकारों के नाम रही। यहां श्रीलंका से आए 10 कलाकारों के ‘ठुरैया ग्रुप’ ने पारंपरिक नृत्य से समां बांध दिया।

20 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper