जैव संपदा के संरक्षण को शोध की जरूरत

Varanasi Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। जैव संपदा के संरक्षण की दिशा में शोध की जरूरत है। इसके लिए पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान के विशेषज्ञाें को देश के अग्रणी शोध संस्थानों से समन्वय स्थापित करना चाहिए। मंगलवार को बीएचयू के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान में एकीकृत एमफिल एवं पीएचडी पाठ्यक्रम का शुभारंभ करते हुए ये बातें कुलपति डा. लालजी सिंह ने कहीं।
कुलपति ने संस्थान को उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हर संभव सहयोग मुहैया कराने का आश्वासन दिया। उन्हाेंने कहा कि पर्यावरणीय प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव के अध्ययन के लिए ऐसे शोध स्थलाें का चयन किया जाय जहां प्रदूषण का प्रभाव कम है। भारत की जलवायु विविधता एवं पर्यावरणीय विषयक शोध से नवीन जानकारियां हासिल की जा सकती हैं। इसके बाद कुलपति ने संस्थान के पुराने कमराें का मरम्मत कराने एवं बड़े कक्षाें को अस्थाई प्रयोगशाला के रूप में परिवर्तित करने का निर्देश दिया। इस मौके पर संस्थान के निदेशक प्रो. एएस रघुवंशी, प्रो. एसपी सिंह, डा. गोपाल शंकर सिंह, डा. जेपी शर्मा, डा. पीसी अभिलाष, डा. टी बनर्जी आदि मौजूद थे।

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