काशी की बेटी के बलिदान को नहीं भूलाया जा सकता

Varanasi Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। काशी की बेटी वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई ने देश की आजादी में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी बलिदान को भूलाया नहीं जा सकता है। सोमवार को महारानी लक्ष्मीबाई की 177वीं जयंती पर भदैनी स्थित उनकी जन्मस्थली पर जागृति फाउंडेशन और महारानी लक्ष्मीबाई जन्मस्थान स्मारक समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और संकट मोचन मंदिर के छोटे महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने ये बातें कहीं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार अजय उपाध्याय ने कहा कि देश के पर्यटन मानचित्र पर इस जन्मस्थली को लाना होगा ताकि पूरा देश उनके प्रति श्रद्धासुमन अर्पित कर सके। उन्हाेंने जन्मस्थली के सौंदर्यीकरण के लिए 21 हजार रुपया दिया। अमर उजाला के एसोसिएट वाइस प्रेसीडेंट यादवेश कुमार ने कहा कि हमें गर्व है कि हमारे मोहल्ले की बेटी ने देश की आजादी में एक मिसाल पेश की। उन्हाेंने कहा कि लक्ष्मीबाई की जन्मस्थली के साथ-साथ काशी की सड़कें, घाट और कुंडाें को सुंदर और स्वच्छ बनाने की जरूरत है ताकि पर्यटक आएं तो यहां से अच्छी छवि लेकर लौटें। जागो बनारस के संयोजक दीपक मधोक ने कहा कि काशी को सुंदर बनाने के लिए लोगाें को आगे आने की जरूरत है। वरिष्ठ पत्रकार आनंद बहादुर सिंह ने महारानी लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। छात्र-छात्राआें ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति की। इसमें नंदलाल बाजोरिया, भुनेश्वर मिश्र, विश्वनाथ यादव, कुंवर सुरेश सिंह, प्रो. कौशल किशोर मिश्र, अशोक पांडेय, बद्री विशाल, दिनेश मिश्र, तुलसीदास मिश्रा आदि उपस्थित थे। सुंदरपुर स्थित धीरेंद्र महिला पीजी कालेज में भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें चेयरमैन रवींद्र जायसवाल, प्राचार्या डा. नलिनी मिश्रा आदि उपस्थित थीं। इधर, जनता हिताय समिति के कार्यकर्ता सोमवार को नगर आयुक्त से मिलकर देव दीपावली के पूर्व लक्ष्मीकुंड सरोवर और आसपास के क्षेत्रों की सफाई की मांग की।

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