सीओपीडी से बचाव को जागरूकता जरूरी

Varanasi Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। चेस्ट फिजीशियन डॉ. ऋतंधर मिश्र और डॉ. संजय पांडेय ने कहा कि सीओपीडी (क्रोनिक आप्सटेक्टिव परमोनरी डिजीज) के मरीजों के लिए पटाखे घातक हैं। उन्हें पटाखे, धूल, धूम्रपान और धुएं से अपने को बचाना होगा, जिससे वह इसके शिकार होने से बच सकेंगे। कहा कि सीओपीडी से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। चिकित्सकों ने शनिवार को नदेसर स्थित एक तारांकित होटल में 14 नवंबर को मनाए जाने वाले विश्व सीपीओडी दिवस के संदर्भ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अस्थमा बच्चों और 40 साल तक के लोगों को होता है लेकिन सीओपीडी 40 साल से ऊपर वालों को अटैक करता है। अधिकतर धूम्रपान करने वाले इसकी चपेट में आते हैं। पूरे विश्व में तीन लाख लोग प्रतिवर्ष इससे पीडि़त होकर मरते हैं। श्री पांडेय ने बताया कि सीओपीडी एक क्रोनिक बीमारी है। जिसका मुख्य लक्षण सांस फूलना और लगातार बलगमयुक्त खांसी है। इससे बचाव का एक ही रास्ता है कि धूम्रपान बंद कर दिया जाए। डॉ. ऋतंधर मिश्र ने बताया कि सीओपीडी की जांच अब आसान हो गई है। इसके लिए स्पिरोमेट्री टेस्ट एक आसान जांच प्रक्रिया है। यदि प्रारंभिक अवस्था में इसका पता लग जाए तो इस बीमारी की वृद्धि पर अंकुश लगाया जा सकता है।

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