बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी सेवा ठप, वार्ड खाली कराया गया

Varanasi Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। रेजीडेंट डाक्टरों की हड़ताल से बीएचयू अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था चरमराने लगी है। शनिवार को इमरजेंसी ओपीडी और वार्ड बंद कर दिए गए। यहां भर्ती मरीजों को रेफर कर वार्ड खाली करा लिया गया। मरीजों की भर्ती अगले आदेश तक बंद कर दी गई है। ओपीडी में सामान्य मरीजों का तो इलाज किया गया, लेकिन गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अन्यत्र रेफर कर दिया गया। जटिल आपरेशन सोमवार तक के लिए टाल दिए गए। दूसरे दिन हड़ताली रेजीडेंट चिकित्सकों ने बांहों पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया।
हड़ताल के कारण सुबह नौ बजे जब वरिष्ठ चिकित्सक ओपीडी में पहुंचे तब इलाज शुरू हो पाया। दोपहर दो बजे सारे ओपीडी बंद हो गए। दोपहर 12 बजे मरीजों का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया गया। इसके चलते 12 बजे के बाद आने वाले मरीजों को लौटना पड़ा। कई मरीज इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे तो कई अस्पताल में फर्श पर लेटकर हड़ताल समाप्त होने का इंतजार करते दिखे। आर्थोपेडिक्स ओपीडी में रेजीडेंट डाक्टर्स के नहीं रहने से मरीजाें का प्लास्टर नहीं हुआ। इसमें केवल हड्डी के दर्द वाले मरीज ही देखे गए। इसी प्रकार मेडिसिन, हार्ट, न्यूरोलाजी, यूरोलाजी में दो बजे तक मरीज देखे गए। परिसर में मरीज दर, दर भटकते रहे लेकिन उनके उपचार की व्यवस्था अस्पताल प्रशासन ने नहीं की। शुक्रवार को ओपीडी में 3464 मरीजाें का उपचार किया गया था जबकि शनिवार को सिर्फ 2098 मरीजों का ही इलाज हुआ। आपरेशन थियेटर में 94 आपरेशन हुए जबकि 12 मरीजाें को सोमवार को बुलाया गया है। रेजीडेंट चिकित्सकाें की हड़ताल समाप्त कराने के लिए आईएमएस निदेशक की अध्यक्षता में आपात बैठक बुलाई गई। इसमें रेजीडेंट चिकित्सकाें से एक दौर की और वार्ता करने का निर्णय लिया गया।
इधर, रेजीडेंट डाक्टर पर हमले के आरोपी लंका के रत्नेश और राधे ने एसीएम प्रथम की अदालत में समर्पण कर दिया। यहां से कुछ देर बाद वे जमानत पर रिहा हो गए। जबकि, एक आरोपी एक दिन पहले गिरफ्तार कर लिया गया था। रेजीडेंट डाक्टर बीएफए की छात्रा अंकिता शर्मा को विश्वविद्यालय से निलंबित करने, पुलिस चौकी स्थापित करने, सुरक्षा मुहैया कराने तथा स्टूडेंट्स हेल्थ सेंटर को 24 घंटे खोलने की मांग पूरा करने के लिखित आश्वासन पर अड़े हैं।
कोट
इमरजेंसी वार्ड में मरीजाें को इसलिए भर्ती नहीं किया जा रहा है कि रेजीडेंट डाक्टर नहीं हैं। यदि किसी मरीज की मौत हो जाएगी तो कौन जिम्मेदार होगा? मेडिकल अफसराें को प्राइमरी उपचार करने को कहा गया है। इमरजेंसी में मरीजाें को कब भर्ती किया जाएगा अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। - प्रो. यूएस द्विवेदी, चिकित्सा अधीक्षक, सर सुंदरलाल अस्पताल

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