कानपुर से बलिया तक विषैला हो रहा गंगा जल

Varanasi Updated Thu, 18 Oct 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। भले ही देश के विभन्न हिस्सों में नदियों को बचाने की जंग लड़ी जा रही हो लेकिन भारत की जीवन रेखा कही जाने वाली गंगा का जल दिनोंदिन निष्प्रयोज्य होने की ओर बढ़ रहा है। कानपुर से बलिया के बीच किए गए सर्वेक्षण से पता चला कि गंगा का जल इस साल की शुरुआत की तुलना में अक्तूबर आते-आते कहीं अधिक विषैला हो गया।
चौंकाने वाली बात तो यह है कि कानपुर से बलिया के बीच गंगा के जल में आयरन, मैगनीज, कैडमियम और लेड भी मिलने लगा है जबकि, अक्तूबर 2012 से पहले इन तत्वों की मौजूदगी नहीं थी। कानपुर में काफी प्रयास के बाद गंगा जल में एमपीएम कॉलीफार्म बैक्टीरिया की मात्रा कम करने में सफलता मिली थी। वर्ष 2010 में यहां सौ मिली लीटर जल में कॉलीफार्म की मात्रा 54 लाख थी जिसे 2011 में 35 लाख तक पहुंचा दिया गया था। लेकिन, अब एक बार फिर यह मात्रा पुराने स्तर पर पहुंच गई है। और तो और ई. कोलाई टेस्ट के पॉजिटिव होने से कानपुर का गंगाजल पीने योग्य बिल्कुल नहीं रह गया है। कानपुर से आगे बढ़ती गंगा अपने साथ आयरन, मैगनीज और लेड इलाहाबाद तक ला रही है। इलाहाबाद की गंगा में प्रत्येक सौ मिली लीटर जल में आयरन 16.1 मिलीग्राम से 12.6 मिलीग्राम, मैगनीज 0.47 से 0.41 एमएन और लेड की मात्रा 0.10 एमजी से 0.34 एमजी तक मिली है। यहां गंगा के जल में शीशे की मौजूदगी बढ़ने लगी है। इलाहाबाद से आगे बढ़ने पर वाराणसी में भले ही सिर्फ आयरन और मैगनीज की मौजूदगी मिली हो लेकिन बलिया में पुन: आयरन, मैगनीज के साथ ही लेड की मात्रा भी गंगा जल में पाई गई है। एक न्यूज चैनल द्वारा कानपुर से बलिया के बीच कराए गए जल परीक्षण में वाराणसी की गंगा के जल में आयरन 6.5 एमजी से 3.7 एमजी के बीच और मैगनीज की मात्रा 0.25एमजी से 0.38 एमजी मिली। इससे भी अधिक चिंता का विषय यह है कि काशी में प्रवेश करते समय गंगा के सौ एमएल जल में एमपीएन कॉलीफार्म नामक बैक्टीरिया की संख्या एक लाख 40 हजार है। काशी से बाहर होते वक्त इस बैक्टीरिया की संख्या तीन लाख 50 हजार हो जा रही है। इस वर्ष की शुरुआत में काशी में इसकी मात्रा मात्र 54 हजार ही थी। बलिया के गंगा जल में ई.कोलाई टेस्ट इलाहाबाद और कानपुर की भांति पॉजिटिव पाया गया है।

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