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घर को स्वर्ग बनाएं, बच्चों में डालें संस्कार

Varanasi Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। ‘जीने की कला’ सीखने, समझने के लिए रविवार को संत सुधांशु जी महाराज के सानिध्य में लोग उमड़ पड़े। पांच दिनी कथा के आखिरी दिन उन्होंने परिवार, संस्कार, एकता और हरियाली पर विस्तार से रोशनी डाली। टाउनहाल के मैदान में इस दिन सैकड़ों महिलाओं-पुरुषों ने उनसे मंत्रदीक्षा ली। प्रख्यात संत ने कहा कि अपने घर को स्वर्ग बनाने की कोशिश होनी चाहिए। सौ दवाएं न करो, एक परहेज कर लो तो जीवन सुधर जाएगा।
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उन्होंने कहा कि स्वादिष्ट और अच्छा आहार, संतुलित खानपान, योगासन, प्राणायाम, बड़ों के प्रति आदर, छोटों के प्रति प्यार-सम्मान और वाणी में मधुरता हो तो हर परिवार में स्वर्ग जैसा वातावरण बन जाएगा। वाणी पर नियंत्रण होना चाहिए। सुधांशु जी ने बताया कि पैसा घर में आए लेकिन क्लेश हो, व्यवस्था अव्यवस्था में तब्दील हुई हो, कोई किसी का मान न रखता हो तो लक्ष्मी चली जाती हैं। इसके लिए पति-पत्नी को ऐसा व्यवहार करना चाहिए कि शांति-सुख का वास हो। कहा कि धनोपार्जन ऐसा होना चाहिए जिससे प्रसिद्धि भी मिले और नाम भी। अच्छे वातावरण के सृजन के लिए परिवार के मुखिया को आगे आना चाहिए। उन्हें बच्चों के प्रति भी आदर का भाव रखना चाहिए। संस्कार देने हैं तो खुद शुरुआत करनी पड़ेगी। उन्होंने कथा पंडाल में शिष्यों को पर्यावरण की रक्षा के लिए भी प्रेरित किया और कहा कि हरियाली रही तो शुद्ध-हवा पानी नसीब हो सकेगा।

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