मशविरा है कि पत्थर बनाके रख दिल को...

Varanasi Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। प्यार के अफसाने, शिकवे-सितम और इंसानियत को लेकर शेर-ओ-अदब का दौर बेनियाबाग के मैदान में रातभर चला। मतलों में किसी ने एकता की आवाज बुलंद की तो किसी ने नफरत की दरो-दीवार ढहाने का पैगाम दिया।
रात ढलती गई और अंदाजे बयां की शोखी चटख होती गई। युवा शायर नदीम साद देवबंदी ने शेर अर्ज किया- ये मशविरा है कि पत्थर बनाके रख दिल को/ये आइना ही रहा तो जरूर टूटेगा/हमारे जैसी बहुत सूरतें मिलेंगी मगर/हमारे जैसी शराफत कहां से लाओगे...। शायरा श्याम सिंह सबा ने नज्म पढ़ी- कब मैं कहती हूं मुझ पर करम कीजिए/फिर इतना न जुल्मोसितम कीजिए/हमको रुसवा न कीजे सरे अंजुमन/सिर्फ तनहाई में आंख नम कीजिए...। अना देहलवी का गला साथ न देने पर लगा कि मुशायरे से लोगों का ताल्लुक छूट जाएगा। इस पर राही बस्तवी का गर्मजोश खैर मकदम हुआ। उन्होंने अमन और एकता का पैगाम कुछ इस तरह दिया- दुनिया की नजरों में कद घट जाएगा/जिस दिन भारत टुकड़ों में बंट जाएगा...। ताहिर फराज रामपुरी ने कम वक्त में हजरात का दिल और मंच का भरोसा जीतने की कोशिश की। उनके शेर इस तरह थे- जमी है बर्फ जो पलकों पे मत पिघलने दे/जरा सी देर तक ठंडी हवा भी चलने दे/खफा न हो मेरे घर की उदास तनहाई/मैं तेरे पास ही आऊंगा शाम ढलने देे...। उनके दूसरे शेर को लोगों ने हाथोहाथ लिया- इतना कसूर उनका कोई कम तो नहीं है/गम देके वो पूछे हैं कोई गम तो नहीं है...। जानी-मानी शायरा शबीना अदीब ने गजल पेश की- कभी दुपट्टे का कोना भी नम नहीं होता/जहां हो प्यार तो वहां कोई गम नहीं होता...। दुबई से आए मेहमान शायर डॉ. जुबैर फारुखी ने सुनाया- वो आसमां का चांद था धरती पे सो गया/उतरा पलक से और मेरे पहलू में सो गया...।
रात ढलने के बाद और पौ फटने से पहले जानेमाने शायर राहत इंदौरी ने अपने अल्फाज से हर किसी का दिल जीत लिया। उनके शेर यादगार बनते गए। उन्होंने सुनाया- जंग हो या इश्क हो भरपूर होना चाहिए/फैसला जो कुछ भी हो मंजूर होना चाहिए...। व्यवस्था पर चोट करते हुए कहा कि- नई हवाओं की सोहबत बिगाड़ देती है/कबूतरों को खुली छत बिगाड़ देती है/जो जुल्म करते हैं वो इतने बुरे नहीं होते/सजा न देके अदालत बिगाड़ देती है...। अंत में संयोजक अशफाक मेनन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इनसेट
नवाजे गए शायर, किताब का विमोचन
वाराणसी। इंडो-पाक मुशायरे में राहत इंदौरी, जौहर कानपुरी, राही बस्तवी, शबीना अदीब को अलग-अलग सम्मान से नवाजा गया। दुबई के शायर डॉ. जुबैर फारुखी की किताब का विमोचन भी किया गया।

इनसेट
पेच फंसने से नहीं आ सकीं पाकिस्तानी शायरा
वाराणसी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की याद में हुए इंडो-पाक मुशायरे में इस बार पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व वीजा की पेचीदगी के चलते नहीं हो सका। वहां की शायरा नैना अदील को आना था। मुशायरे में उन्हें 13 अक्तूबर को शिरकत करनी थी और उसी दिन सुबह उन्हें दो दिन का वीजा मिला। भारत के लिए पाकिस्तान एयरलाइंस की उड़ान हफ्ते में दो दिन गुरुवार और सोमवार को ही होती है। ऐसे में नैना चाहकर भी नहीं आ सकीं। संयोजक अशफाक मेनन ने इसकी पुष्टि की।

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