लोकतंत्र सेनानियों की सूची तक नहीं बनी

Varanasi Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। 19 दिसंबर 1975 को लहुराबीर चौराहे पर सत्याग्रह के दौरान सेनपुुरा निवासी हीरालाल कुशवाहा साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिए गए थे। वर्ष 2006 में आवेदन करने के बाद भी लोकतंत्र सेनानियों की सूची में उनका नाम नहीं शामिल किया गया। उनकी तरह ऐसे तमाम लोग हैं जो अभी तक लोकतंत्र सेनानी का दर्जा नहीं पा सके हैं। प्रदेश सरकार ने 14 सितंबर को शासनादेश जारी करके लोकतंत्र सेनानियों को तीन हजार मासिक मानदेय, मुफ्त बस यात्रा और इलाज की सुविधा देने का निर्देश दिया था। लगभग महीने भर बाद भी लोकतंत्र सेनानियों की सूची तक नहीं बनी।
वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने आपातकाल के दौरान मीसा और डीआईआर के तहत गिरफ्तार लोगों को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया था। उन्हें मानदेय, चिकित्सा और मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई थी। सरकार बदलने के बाद योजना समाप्त कर दी गई थी। अब लोकतंत्र सेनानियों की सुविधा बहाल कर दी गई है। उनको अप्रैल महीने से मानदेय का भुगतान किया जाना है। जिला प्रशासन को सितंबर में ही लोकतंत्र सेनानियों की सूची भेजने का निर्देश दिया गया था। जिलाधिकारी ने इस पत्र को एक अधिकारी को मार्क किया और वह दूसरे अफसर के पास चला गया। इस फेर में सूची तैयार ही नहीं हो पाई। बादशाह अली, नन्हें खां, विजय यादव, अशोक त्रिपाठी, विजय नारायण, लक्ष्मी शंकर, लल्लन दूबे, संकठा पांडेय बमगुरु सहित तमाम नेता लगातार अफसरों के यहां सूची भेजने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। सूची नहीं मिलने के कारण रोडवेज के बस कंडक्टर ने पिछले दिनों शिवपुर के बैजनाथ से किराया वसूल लिया था। सरकार ने छूटे हुए लोगों का नाम भी शामिल करने के लिए कहा था। कई लोगों ने आवेदन भी दिया है लेकिन शासन की योजना पर स्थानीय प्रशासन पानी फेरने में लगा है। पूर्वमंत्री और लोकतंत्र सेनानी शतरूद्र प्रकाश का कहना है कि शासन की योजना लालफीताशाही में फंस गई है। उधर, एडीएम आपूर्ति एसके मौर्य ने बताया कि सूची तैयार कराई जा रही है।

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