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अगवा फौजी ने किया सशर्त समझौता

Varanasi Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। कानपुर से अपहृत रिटायर्ड फौजी लंका थाने में आने के बाद पैसा लौटाने का वादा किया। उसने किस्तों में बेरोजगारों का पैसा वापस करने की बात कही। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच स्टंाप पेपर पर सशर्त समझौता हुआ। फिर पुलिस ने दोनों पक्षों को छोड़ दिया।
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बता दें कि भोजपुर (बिहार) निवासी रिटायर्ड फौजी राजपति सिंह और कछवा के रिटायर्ड फौजी राजेंद्र पाल दोनों दोस्त थे। राजेंद्र की माने तो उसने कानपुर एफसीआई में नौकरी लगाने के लिए 10 बेरोजगारों से 22 लाख रुपये अपने मित्र राजपति को दिलवाया था। नौकरी नहीं लगने और पैसा नहीं देने पर बेरोजगार राजेंद्र के पीछे पड़ गए। इस बीच, राजपति कानपुर चला गया। पता लगाने के बाद उसके साथियों ने कानपुर रेलबाजार थाने के रेलवे कालोनी से रिटायर्ड फौजी को नशीला पदार्थ खिलाकर स्कार्पियों से अगवा कर लिया। उसे कछवा में रखा गया था। राजपति के भांजे ने लंका पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने इस मामले में कैंट से राजेंद्र, उसके सिपाही भाई समेत तीन लोगों को स्कार्पियों के साथ पकड़ लिया। स्कार्पियों सारनाथ के एक सपा नेता की थी। देर रात पुलिस ने काफी प्रयास के बाद अगवा रिटायर्ड फौजी को अपहर्ताओं से मुक्त करा लिया। थाने पहुंचने पर अगवा फौजी ने किस्तों में पैसा देना कबूल किया। दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद लंका पुलिस ने पकड़े गए लोगों को छोड़ दिया।

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