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काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए बनेगी नई नियमावली

Varanasi Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। अधिग्रहण के 29 साल बाद पहली बार शासन काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए नई नियमावली बनाई जाएगी। पूजा, दान और दर्शनार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं के कर्मचारियों और पुजारियों की सेवा आदि से संबंधित यह नई नियमावली तिरुपति बालाजी और वैष्णो देवी मंदिर की नियमावली की तर्ज पर बनेगी। यह फैसला शनिवार की शाम मंदिर न्यास की आपात बैठक में लिया गया। इस निमित्त दोनों मंदिरों की नियमावली तीन सदस्यीय न्यासी समिति को सौंप दी गई।
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सूबे के धर्मार्थ कार्य सचिव नवनीत सहगल की मौजूदगी में हुई न्यास की आपात बैठक में नई नियमावली की रूपरेखा तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया। न्यास के तीन सदस्यों की समिति दोनों विख्यात मंदिरों की नियमावली का अध्ययन कर जरूरी प्रक्रियाओं को चुनेगी, ताकि नए संविधान की प्रस्तावना तैयार हो सके। न्यास के सदस्य प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, प्रो. सुधांशु शेखर और उमाशंकर पोद्दार को इसकी जिम्मेदारी दी गई। न्यास को अधिकार संपन्न बनाने एवं सुविधाएं बढ़ाने के साथ ही मंदिर के विस्तार और विकास के लिए नई नियमावली के निर्माण की प्रक्रिया तेज करने को निर्देश दिया गया। 1983 में अधिग्रहण के समय बनाई गई लचर नियमावली के चलते अब तक बड़े फैसले लेने में लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अफसरों के हाथ बंधे थे। मंदिर प्रशासन 10 हजार रुपये से अधिक की राशि किसी भी विकास कार्य या खरीद पर खर्च करने का अधिकार नहीं रखता। इससे अधिक के व्यय पर न्यास से प्रस्ताव पास कराने के अलावा शासन की भी अनुमति लेनी पड़ती है।

बैठक में मंदिर के विस्तार के लिए जर्जर भवनों की खरीद संबंधी क्रय-विक्रय समिति को हफ्ते भर में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया। चार नि:शुल्क शास्त्रियों को पुजारी बनाने के विवाद का भी पटाक्षेप कर दिया गया। शिकायतों से पेंच फंसने के चलते नए पुजारियों के मानदेय पर रोक लगा दी गई थी। उनके मानदेय जारी करने का निर्देश दिया गया। पुजारियों के अलावा कर्मियों की नई मानदेय नीति बनाने का भी सुझाव न्यास पटल पर रखा गया। साथ ही लिपिकों के कार्यक्षेत्र बदलने का निर्देश भी दिया गया। एनामल पेंट छुड़ाने के मसले पर सचिव ने चलते-चलते बात तो की लेकिन स्पष्ट निर्देश नहीं दिया। हाल में ही बरामद स्वर्ण शिखर के मूल्यांकन या उसके पुनर्स्थापन के अलावा रानी भवानी के भुवनेश्वर और तारकेश्वर मंदिरों के शिखरों को स्वर्ण मंडित करने के मसौदे चर्चा के लिए रखे ही नहीं गए। सचिव ने कहा कि जल्द ही न्यास की दूसरी बैठक बुलाई जाएगी। अपर मुख्य कार्यपालक पारस नाथ द्विवेदी एवं एडीएम सिटी एमपी सिंह भी मौजूद थे।

इनसेट
गर्भगृह में ही पुजारियों के रोटेशन का निर्देश
वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर में तैनात पुजारियों के रोटेशन ड्यूटी के झाम को भी न्यास के सामने पेश किया गया। अमर उजाला में छपी इस आशय की खबर पर मंदिर में दिन भर हड़कंप की स्थिति रही। धर्मार्थ सचिव ने जब इस मामले की जानकारी ली तब बताया गया कि गर्भगृह में 13 पुजारी तैनात हैं। न्यास के सदस्यों ने पक्ष रखा कि गर्भगृह का जिम्मा संभालने वाले पुजारी प्रशिक्षित और पांडित्य परंपरा के मर्मज्ञ हैं, ऐसे में उनका वहां होना जरूरी है। इस पर सचिव ने निर्देश दिया कि गर्भगृह के पुजारियों का रोटेशन गर्भगृह में ही किया जाना चाहिए।

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