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मुशायरे में उछले भूख-रोटी के मुद्दे

Varanasi Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। भूख-रोटी, आतंक से लेकर प्यार-सद्भावना के अंदाजे बयां शनिवार की रात शेर-ओ-अदब में उभरे तो मौजूदा हालात की तसवीर सी खिंच गई। कबीर और नजीर की जमीन पर अरब के नामचीन शायर डॉ. जुनैद फारुखी, राहत इंदौरी, मुनव्वर राना और जौहर कानपुरी की गजलों के शेर एक-एक कर लोगों को जेहन-ओ-दिल में उतरते चले गए। देर रात तक कलाम में एक से बढ़कर एक मिसरों पर तालियों की बौछार के साथ चौतरफा इरशाद गूंजता रहा। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की याद में आयोजित यह इंडो-पाक मुशायरा सुनने के बेनियाबाग का मैदान खचाखच भरा था।
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शायर उस्मान मीनाई ने राजनीति से लेकर रोटी तक के मसलों को अपने मिसरे में उठाया। उनके शेर इस तरह थे-मोहतरम जब से सियासत के हवाले हो गए/ उजले बाहर से हुए अंदर से काले हो गए...। तुम्हारा दबदबा खाली तुम्हारी जिंदगी तक है/ किसी कब्र के अंदर जमींदारी नहीं चलती...। सूखी रोटी के निवालों में बहुत बरकत है/ ऐ हुकूमत तेरे इफ्तार से क्या होता है...। ऐलान बंद हो गए सारे बयान बंद/ ओहदा मिला वजीर बने सारे बयान बंद। रोती है चीखती है गरीबों की जिंदगी, दिल्ली ने कर ली है अपने कान बंद। सुहैल उस्मानी को लोगों ने तबीयत से सुना। मुहब्बत तुम भी करते थे मुहब्बत मैं भी करता था/ कहां डूबा वफाओं का किनारा हम नहीं समझे...। रेहान हासमी की गजलों पर तो तालियों की बौछार अंत तक हुई। दाद इतनी मिली कि उन्हें लौट कर माइक पर आना पड़ा। उनके शेर थे-हम हैं दाना हमें नादान न लिखा जाए/ हमको बर्बादी का सामान न लिखा जाए/ हादसा जब भी हुआ हम भी मरे तुम भी मरे/ कौम के माथे पे मुसलमान न लिखा जाए...। जुल्म का सब्र का नफरत का ए पैगाम न दे/ बेगुनहों का लहू चीख-चीख बोला...। ए जिंदगी है परेशानियों से मत डर जा/ सुब्ह का भूला हुआ है तो शाम को घर जा/ ए मुसलमान का इमान ही तो सबकुछ है/ हराम खाने से बेहतर है कि भूखा मर जा..। इब्राहिम सागर ने अपने चुटीले अंदाज से लोगों को खूब हंसाया। -अपनी दुनिया समझ रहे हैं कुएं की गोलाई को,अपने मुन्ने झेल रहे हैं रोजाना रुसवाई को...।

मीसम गोपालपुरी के शेर थे-मैं शहर मं रहूं या रहीं अपने गांव में,हर लम्हा मैं तो रहता हूं मां की दुआओं में...। - शायरा इरम ने पढ़ा कि इस दिल को करार आ जाए...मेरी उजड़ी हुई दुनिया में बहार आ जाए। पीतलनगरी की शायरा जीनत मुरादाबादी ने कलाम पेश किया-दिल पे हर बात का एहसास रखूं क्या करना/तेरा खोना ही मुकद्दर है तो गम क्या करना...। सरबर कमाल झांसवी-जिंदगी भर हम तो उनसे दोस्ती करते रहे/ वो हमारा घर जलाकर रोशनी करते रहे...। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने दीप जलाकर मुशायरे का उद्घाटन किया। पिंडरा के विधायक अजय राय समेत तमाम लोग मौजूद थे। संयोजन अशफाक मेनन ने किया। संचालन नदीम फारुख ने किया।

मुमताज को राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार
वाराणसी। इंडो-पाक मुशायरे में राजीव गांधी सद्भावना सम्मान मुमताज को दिया गया।

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