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हमारे बीच से चला गया ‘वयोवृद्ध बालक’

Varanasi Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। प्रख्यात बाल साहित्यकार डा. श्रीप्रसाद के निधन से न सिर्फ काशी के साहित्यकार समाज अपितु रंगकर्म से जुड़े लोगों में भी शोक की लहर है। उनके शुभचिंतकों और प्रशंसकों में अब उनकी स्मृतियां ही शेष हैं। पहली शोक सभा का आयोजन बाल रंग मंडल की ओर से किया गया। डा. श्रीप्रसाद मंडल के छोटे-बड़े सभी कार्यक्रमों में पूरी रुचि के साथ हिस्सा लेते थे।
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भोजपुरी गीतकार पं. हरिराम द्विवेदी ने कहा कि बाल मन की अनुभूतियों को निकटता से महसूस करने वाला ‘वयोवृद्ध बालक’ हमारे बीच से चला गया। बच्चों के मन का मर्म वह बखूबी समझते थे। डा. श्रीप्रसाद के मित्र वरिष्ठ रंगकर्मी नीलकमल चटर्जी ने कहा कि डा. प्रसाद किसी भी समारोह में जाते तो ‘हल्लम हल्ला’ और ‘बिल्ली को जुकाम’ जरूर सुनाते थे। रंगसेवी अशोक अग्रवाल ने कहा ‘बिल्ली को जुकाम’ शीर्षक की कविता स्वीडिश संग्रह में शामिल होने पर उनकी विश्वव्यापी पहचान भी बनी। बालरंग मंडल की शोकसभा में अध्यक्ष कंचन कुमार कुशवाहा, सलीम राजा, प्रतिमा सिन्हा, जवाहरलाल शास्त्री, राकेश वर्धन, रविकांत मिश्र, मनोज विश्वकर्मा, मनोज मलिक, सीमा वर्मा, रितेश श्रीवास्तव आदि ने उन्हें कालजयी बाल रचनाकार की संज्ञा दी। इंडियन एसोसिएशन आफ जर्नलिस्ट की आपात बैठक में डा. श्रीप्रसाद के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने उनकी साहित्य सेवा की चर्चा की। सर्वश्री डा. कैलाश सिंह विकास, राजेंद्र लाल श्रीवास्तव, लक्ष्मी शंकर सेठ, अर्जुन सिंह, अनुराग पाठक, मोहम्मद शाहिद आदि उपस्थित रहे। उधर, विश्वनाथ प्रकाशन परिसर में हुई शोकसभा में डा. श्रीप्रसाद के साहित्यिक अवदान की चर्चा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान प्रकाशक उमाशंकर सिंह ने कहा कि डा. श्रीप्रसाद बाल साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर थे। हाल ही में उन्हें प्रतिष्ठापरक रेखा जैन बाल रंग सम्मान प्राप्त हुआ था। बाल कविताओं, एकांकी, कहानियों का सृजन कर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्र्ीय स्तर पर भी उन्होंने ख्याति अर्जित की। बाल साहित्य के प्रति उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। शोकसभा में इंदुशेखर तिवारी, परमहंस दुबे, कन्हैयालाल, रविशंकर सिंह, राणाप्रताप सिंह, शिवाजी सिंह, राधेश्याम सिंह, विक्रम, विकास, अशोक सिंह, मनोज मिश्र, विजय मिश्र मौजूद थे।

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