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श्रमिकों की कमी कालीन उद्योग की सबसे बड़ी समस्या

Varanasi Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की ओर से संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले चार दिनी इंडिया कार्पेट एक्सपो -2012 (वाराणसी में आठवां मेला) का शुभारंभ शुक्रवार को सुबह दस बजे होगा। इसका उद्घाटन योजना आयोग एवं प्रधानमंत्री कार्यालय की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य डा. सुमित्रो चौधरी और टेक्सटाइल सचिव किरन धींगरा करेंगी। यह जानकारी गुरुवार को होटल ताज गेटवे में सीईपीसी के अध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने पत्रकारों को दी।
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उन्होंने बताया कि मेले में विभिन्न प्रांतों के 296 निर्यातकों की ओर से स्टाल लगाए जाएंगे। इसमें रूस, चीन, चिली, साउथ अफ्रीका, आस्ट्रेलिया आदि देशों के ग्राहक शिरकत करेंगे। कालीन मेले में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के चलते शहर के सभी होटल फुल हो चुके हैं। श्री सिंह का कहना है कि श्रमिकों की कमी कालीन उद्योग की सबसे बड़ी समस्या है। मनरेगा के चलते कारेपट की बुनाई के लिए श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। बताया कि पूरे देश में एक हजार वीबर्स ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे। पत्रकारवार्ता के दौरान भरत लाल मौर्या, घनश्याम शुक्ला, कुलदीप राज बाटल, ओमकार नाथ मिश्रा भी मौजूद थे।


इनसेट
अपने जमीन में कालीन मेला लगाने की योजना स्थगित
वाराणसी। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने कहा कि अपनी जमीन पर कालीन मेला लगाने की योजना स्थगित कर दी गई है। क्योंकि, इसके लिए 40 करोड़ खर्च करने होंगे। भवनों आदि के रखरखाव पर हर महीने 2.5 लाख रुपये का खर्च अतिरिक्त आएगा। साल भर में मेला तो केवल चार-पांच दिन ही लगेगा और बाकी दिनों में भवन खाली रहेगा।

खराब सड़कें लगाएंगी बनारस की छवि पर दाग
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित इंडिया कार्पेट एक्सपो में भाग लेने के लिए 53 देशों के ग्राहक बनारस आ रहे हैं। वेे बनारस के अलावा भदोही, मिर्जापुर के कालीन क्षेत्रों का भी भ्रमण करेंगे। सीईपीसी के पदाधिकारियों का कहना है कि बदहाल सड़कें विदेशियों के सामने सिर झुका देंगी। खराब सड़कें काशी की छवि पर धब्बे के समान है।

ज्वेल कार्पेट रहेगा आकर्षण का केंद्र
वाराणसी। इस बार कालीन मेले में ज्वेल कार्पेट आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस कालीन को आगरा के निर्यातकों ने नगीनों से तैयार किया है। आगरा के स्टाल पर इसे प्रदर्शित किया जाएगा।

प्राइज वार में मात खा रहा हैंडमेड कालीन
वाराणसी। विदेशों में छिड़ी प्राइज वार के चलते पूर्वांचल का हैंडमेड कालीन मात खा रहा है। दूसरे देशों में बिजली और डीजल यहां के मुकाबले काफी सस्ता है। बैंकों का ब्याज भी कम है। ज्यादातर देशों में अधिकतम चार फीसदी ब्याज देना होता है। जबकि, यहां छूट के बाद भी निर्यातकों से 10 फीसदी ब्याज लिया जाता है।

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