भटके हुए बच्चे रेलवे स्टेशनों में नहीं रहेंगे बेसहारा

Varanasi Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। घर से भाग कर या भटक कर रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाले बच्चे अब बेसहारा नहीं रहेंगे। गोरखपुर और बनारस में ऐसे बच्चों के लिए कैचमेंट होम बनेंगे। वहीं उनकी काउंसिलिंग की जाएगी और घरवालों को बुलाकर सुपुर्द किया जाएगा या फिर बाल गृह भेजा जाएगा। यह जानकारी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की कोर कमेटी के चेयरमैन डा. योगेश दूबे ने सोमवार को सर्किट हाउस में दी। वह मंगलवार को भदोही, बनारस और सोनभद्र के श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ बाल श्रमिकों की स्थिति और जेल में बंद बच्चों की दशा की समीक्षा करेंगे। शाम को उन्होंने केंद्रीय और जिला कारागार में जाकर महिला कैदियों और बच्चों के बारे में जानकारी हासिल की।
उन्होंने बताया कि सभी जेलों में महिला कैदियों के साथ उनके बच्चे भी पल रहे हैं। उनकी संख्या का पता लगाने के लिए डीजीपी को कहा गया है। हफ्ते भर में उसका विवरण मिल जाएगा। पूर्वांचल की सबसे बड़ी समस्या बच्चों के विस्थापन, ट्रैफेकिंग और बाल श्रम की है। दुर्भाग्य से इनका सही आंकड़ा विभागों के पास नहीं है। प्रदेश में शिक्षा अधिकार अधिनियम की हालत भी ठीक नहीं है। समन्वित बाल संरक्षण योजना के तहत ऐसे बच्चों के पुनर्वास के लिए भदोही, झांसी, चित्रकूट, गोरखपुर, अलीगढ़ में आधुनिक बाल गृहों की स्थापना की जाएगी। लखनऊ में बच्चों के लिए माडल होम बनाया जाएगा। देश के नौ राज्यों में बाल आयोग का गठन हो चुका है। उत्तर प्रदेश में भी आयोग बनवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सोनभद्र के बिल्ली, मारकुंड़ी रिजर्व फारेस्ट, डाला की स्टोन खादानों के इलाके की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जांच कराई गई थी। प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पाया गया था। उसे कम करने के क्या उपाय किए गए, इसकी पड़ताल की जाएगी। जापानी इंसेफ्लाइटिस से गोरखपुर और आसपास के इलाके में हजारों बच्चे मानसिक रूप से विकलांग हो जाते हैं। उनके पुनर्वास के लिए भी एक केंद्र बनाने की योजना पर काम चल रहा है।

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