अधिक नाइट्रोजन खेत और फसल के लिए खतरनाक

Varanasi Updated Sun, 07 Oct 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। फसलाें को अधिक नाइट्रोजन देने की प्रवृत्ति किसानाें में बढ़ती जा रही है लेकिन यह फसल और खेत दोनों के लिए खतरनाक है। इससे जल प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिगिं, जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ता जा रहा है। सरकार भी इससे चिंतित है। किसानाें को चाहिए कि प्रति हेक्टेयर 120 किलो नाइट्रोजन से अधिक इस्तेमाल न करें। शनिवार को बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान में आयोजित व्याख्यान में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक डा. हिमांशु पाठक ने ये बातें कहीं।
नाइट्रोजन के कृषि में प्रयोग से जलवायु परिवर्तन विषयक व्याख्यान में उन्हाेंने किसानाें को सलाह देते हुए कहा कि यूरिया खाद खरीदने के बाद समय समय पर नमूने की जांच करानी चाहिए। साथ ही मृदा की भी जांच कृषि वैज्ञानिकों से करानी चाहिए। इससे नाइट्रोजन के दुष्प्रभाव का पता चलता रहेगा। इसके अलावा प्रत्येक किसान को लीव कलर चार्ट रखना चाहिए, जिससे फसल के अनुरूप खाद देने की जानकारी मिल सकेगी। उन्हाेंने कहा कि तीन साल में फसल की प्रजाति बदल देना चाहिए। इससे मृदा की गुणवत्ता बरकरार रहेगी। कार्यक्रम में संस्थान के प्रो. आनंद शंकर सिंह, डा. जर्नादन यादव, प्रो. पी राहा, एवं डा. यूपी सिंह आदि ने ने हिस्सा लिया।

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