बच्चों की फूड हैबिट में करें बदलाव

Varanasi Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। अपने बच्चों की फूड हैबिट में बदलाव करें। अत्यधिक तेल और मसालेदार खाद्य वस्तुएं हृदय को कमजोर बना देती हैं। ये सलाह बीएचयू के युवा चिकित्सक उन मरीजों को दे रहे हैं जो हृदय रोग का उपचार कराने बीएचयू पहुंच रहे हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को भविष्य में इस बीमारी से बचाना है। यही नहीं, डाक्टर घरेलू महिलाओं को भी बाहर निकलने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि घर में उनका शारीरिक व्यायाम नहीं हो पाता।
सर सुंदर लाल अस्पताल में प्रतिदिन औसतन तीन सौ हृदय रोगी उपचार के लिए आते हैं। इसमें 90 प्रतिशत ऐसे होते हैं जिनकी दिनचर्या अनियमित होती है। ओपीडी में 2006 तक मात्र सौ मरीज आते थे लेकिन महज छह वर्षों में यह संख्या बढ़कर तीन गुना हो गई। मरीजाें की बढ़ती संख्या को देखते हुए पिछले साल कार्डियोलाजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. ओमशंकर ने मरीजाें की काउंसिलिंग का अलग कार्यक्रम शुरू किया। इसमें गंभीर मरीजाें को अलग रखा जा रहा है। डा. ओमशंकर ने बताया कि पूर्वांचल के लगभग एक हजार परिवार इन सलाहों पर अमल कर रहे हैं।

बीमारी का कारण :
-जीवन शैली में बदलाव, तनाव, भोजन में शूगर और वसायुक्त खाद्य पदार्थाें का अधिक सेवन, मोटापा आदि

क्या करें हृदय की रक्षा के लिए
- नियमित व्यायाम करें या सुबह 45 मिनट पैदल चलें
- ध्रुपपान कदापि न करें
- फूड हैबिट बदलें, फल, हरी सब्जी का अधिक इस्तेमाल करें
- पीजा, बर्गर, चाउमिंग अथवा अधिक कार्बोहाइड्रेटयुक्त खाद्य पदार्थों से बचें
- रूटीन हेल्थ चेकअप कराते रहें
कोट :-
40 वर्ष पूर्व लोगाें को गठिया के साथ हृदय की बीमारी होती थी। संक्रमण भी प्रमुख कारण होता था लेकिन लोगाें की जीवनशैली में आए बदलाव से अब तो युवा भी इससे पीडि़त होने लगे हैं। अधिक शूगर और तनाव से यह बीमारी अधिक होने लगी है। अमेरिका में हृदय रोगियाें की संख्या पहले से कम हुई है लेकिन भारत में यह संख्या बढ़ती जा रही है। -प्रो. रामहर्ष सिंह, पूर्व कुलपति, आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, राजस्थान
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हृदय रोग से बचाव के लिए जरूरी है कि अर्जुन पौधे का पाउडर बनाकर उसमें छह जवा लहसुन डालें। दोनाें को एक-एक कप दूध और पानी में खौलाएं। इसके बाद इसका नियमित सेवन करें। यह पेय स्वास्थ्यवर्द्धक और ह्लदय रोगियों के लिए फायदेमंद हैं। इसके अलावा हृतपत्री पौधे के पाउडर का भी सेवन किया जा सकता है। -प्रो. एके सिंह, आयुर्वेद संकाय, बीएचयू
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बीमारी से बचाव के लिए जरूरी है कि वे अपनी दिनचर्र्या ठीक करें। नियमित व्यायाम और पौष्टिक आहार सबसे जरूरी है। मरीजाें में प्राय: देखा जाता है कि उनमें इन दोनाें का अभाव होता है। ऐसी ही आदत युवा वर्ग को डालनी चाहिए ताकि वे इस बीमारी का शिकार न हो सकें। - डा. बीके सिंह, निदेशक, बीके हर्ट सेंटर, सुंदरपुर
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अत्यधिक तेल, घी खाने से बचें। यदि सूर्यमुखी और सरसाें के तेल का इस्तेमाल किया जाए तो ठीक रहेगा। मूलअर्थ, सर्पगंधा, कैकटस नामक दवाआें का इस्तेमाल उपयोगी है। इन दवाआें का साइड इफेक्ट भी नहीं है। पीडि़ताें को चाहिए कि व्यायाम जरूर करें। -डा. अर्पिता चटर्जी, होम्योपैथी विभाग, स्टूडेंट हेल्थ सेंटर, बीएचयू

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