प्रेम की परिभाषा की तलाश है ‘मैं मुहब्बत’

Varanasi Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। नई पीढ़ी के सशक्त लेखकों में शुमार चंदौली के सैयद जैगम इमाम का उपन्यास ‘मैं मुहब्बत’ बेशक एक महत्वाकांक्षी युवा पत्रकार की कहानी है जो हिंदू-मुसलिम संस्कृति में पला-बढ़ा है। पूर्वा, सोनाक्षी, संचारी और काव्या जैसे चरित्रों के माध्यम से लेखक ने प्रेम की परिभाषा तलाश की है।
यह निष्कर्ष है यशस्वी कथाकार डा. काशीनाथ सिंह का, जो उन्होंने गुरुवार की दोपहर काशी विद्यापीठ के डा. माखनलाल चतुर्वेदी सभागार में आयोजित ‘मैं मुहब्बत’ के विमोचन के उपरांत सार्वजनिक किया। डा. सिंह ने कहा कि अब तक जितने भी प्रगतिशील मुसलिम हिंदी लेखक हुए हैं वे सभी एक चीज से उबर नहीं सके। यदि उनकी कहानी का विषय मुसलिम लड़का और हिंदू लड़की हुई, दोनों शादी की रजामंदी तक पहुंचे भी तो कहानी के अंत में लड़की को मुसलिम बना दिया। हिंदी के उर्दू लेखकों के साथ कुछ ऐसा ही है। उनकी सलाह थी कि जैगम को नए दौर के अनुसार, नया निर्णय अपने उपन्यास में देना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्यार ही है तो फिर क्यों एक मुसलिम लड़का और हिंदू लड़की शादी के बाद अपने-अपने धर्म के साथ नहीं रह सकते। समारोह में विशिष्ट वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ल एवं अनिल भास्कर ने भी विचार व्यक्त किए। इससे पूर्व, सैयद जैगम इमाम ने अपनी रचना प्रक्रिया पर प्रकाश भी डाला।

‘हूं‘ क्यों जोड़ दिया भाई
वाराणसी। एक तो वैसे ही श्रोताओं का टोटा ‘मैं मुहब्बत’ के विमोचन समारोह में खटक रहा था। ऊपर से संचालक द्वारा उपन्यास का नाम बार-बार ‘मैं मुहब्बत हूं’ कहना तितलौकी को नीम चढ़ा रहा था। डा. काशीनाथ सिंह जब विचार व्यक्त करने आए तो सबसे पहले उन्होंने संचालक को टोका। बड़े प्रेम से अपने अंदाज में बोले ‘जब उपन्यास का नाम मैं मुहब्बत लिखा गया है, वही छपा भी है तो आप उसे मैं मुहब्बत हूं क्यों रट रहे हैं।’

Spotlight

Most Read

Bihar

चारा घोटाला: लालू और जगन्नाथ मिश्रा को 5 साल की सजा, कोर्ट ने 5 लाख का लगाया जुर्माना

पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।

24 जनवरी 2018

Related Videos

अलग अंदाज में मनाया गया BHU स्थापना दिवस, आप भी कर उठेंगे वाह-वाह

सोमवार को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में 102वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस मौके पर पारंपरिक परिधान में सजे छात्र-छात्रों ने झांकियां निकाली। झांकियों के साथ चल रहे स्टूडेंट्स ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते नजर आए।

23 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls