ऋषि पंचमी पर अबकी नहीं होगा बड़ा समारोह

Varanasi Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। ऋषि पंचमी गुरुवार को है और इस दिन को काशीवासी पंडित कमलापति त्रिपाठी ‘बाबू’ की जयंती के रूप में भी जानते हैं। कारण, चार दशक पूर्व पंडित जी के जीवन काल में ही उनके शिष्य राम प्रवेश चौबे ने उनका जन्मदिन समारोह पूर्वक मनाना शुरू किया था। उस परंपरा को जीवित रखा चौबे जी के पुत्र सतीश चौबे ने। लेकिन पिछले साल से ही यह परंपरा सिमटने लगी और अबकी सिर्फ संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय तक ही सीमित रह गई है परंपरा।
पंडित जी का जन्म ऋषि पंचमी को हुआ था। इस लिहाज से उनके शिष्य रामप्रवेश चौबे ने 1972-73 में काशी, गोशाला में पहली बार पंडित जी का जन्मदिन समारोह पूर्वक मनाया। काशी गोशाला से यह कार्यक्रम टाउनहाल के सभागार में स्थानांतरित हुआ फिर नागरी नाटक मंडली में होने लगा। जीवित रहते हर कार्यक्रम में पंडित जी शरीक होते थे। इसमें पूर्वांचल ही नहीं प्रदेश और देश के अन्य कोनों से भी उनके चाहने वालों का जमावड़ा होता था। उनके तिरोधान के बाद जन्मदिन जयंती समारोह में तब्दील हुआ पर उसमें शिरकत करने वालों की कमी नहीं हुई। इसी तिथि को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में भी जयंती मनाई जाती है। पंडित जी नहीं रहे, रामप्रवेश चौबे का भी निधन हो गया तो परंपरा को आगे बढ़ाया सतीश चौबे ने। यह सिलसिला 2010 तक अनवरत जारी रहा।
इसी बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 2007 में दिल्ली में अंग्रेजी तिथि तीन सितंबर को राष्ट्रीय स्तर पर बाबू की जयंती मनायी। उसके बाद से त्रिपाठी परिवार ने इसी को असल समारोह माना। हालांकि नागरी नाटक मंडली के कार्यक्रम में परिवार के लोग शामिल होते रहे। साल भर बाद त्रिपाठी और चौबे परिवार में मनभेद हो गया। फिर भी कार्यक्रम होता रहा। एक साल इस समारोह में शामिल हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ने यहां तक कहा कि पंडित जी जैसी शख्सियत की जयंती हिंदी तिथि से ही मनाई जानी चाहिए। यह बयान चर्चा में रहा। फिर 2010 के कार्यक्रम में राजेश पति नागरी नाटक मंडली के कार्यक्रम में व्यस्तता के कारण नहीं पहुंचे पर अंजलि जी आई थीं। 2011 में इस कार्यक्रम की भव्यता कुछ कम हुई और सतीश चौबे ने अपने खजुरी स्थित आवास पर बाबू की जयंती मनायी। हालांकि यह समारोह भी बड़ा था।

Spotlight

Most Read

Budaun

संरक्षित स्मारक रोजा को मजहबी रंग देने की कोशिश

संरक्षित स्मारक रोजा को मजहबी रंग देने की कोशिश

21 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: श्रीलंका का ये सांस्कृतिक नृत्य देख कर झूम उठेंगे आप

बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के पंडित ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में गुरुवार की शाम श्रीलंकाई कलाकारों के नाम रही। यहां श्रीलंका से आए 10 कलाकारों के ‘ठुरैया ग्रुप’ ने पारंपरिक नृत्य से समां बांध दिया।

20 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper