छावनी बोर्ड को रेलवे से बड़ी राशि मिलने की उम्मीद

Varanasi Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। छावनी बोर्ड को जल्द ही रेल मंत्रालय से सर्विस चार्ज के तौर पर एक बड़ी धनराशि मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में नीतिगत तौर पर सहमत होने के साथ रेल मंत्रालय के बड़े अधिकारियों ने बोर्ड की इस्तेमाल की जा रही जमीन पर सर्वे का काम भी कमोबेश पूरा कर लिया है। सर्विस चार्ज की मांग छावनी बोर्ड दशकों से रेल मंत्रालय से कर रहा है, पर मंत्रालय इस संबंध में उच्च न्यायालय का फैसला छावनी बोर्ड के पक्ष में आने के बाद ही हरकत में आया। वाराणसी छावनी बोर्ड का दावा है कि रेलवे बिना कोई शुल्क दिए उसकी करीब 105.46 एकड़ जमीन का इस्तेमाल 1982 से पहले से कर रहा है। बोर्ड ने सर्विस चार्ज के तौर पर रेलवे से दस करोड़ 82 लाख 84 हजार 924 रुपये की मांग की है।
सर्विस चार्ज को लेकर रेलवे तथा छावनी बोर्ड के बीच विवाद दशकों पुराना है। बोर्ड ने काफी खतोकिताबत की, पर मंत्रालय के कानों में जूं नहीं रेंगी। अंतत: बोर्ड ने अदालत की शरण ली। उच्च न्यायालय ने बीती 23 जुलाई को बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय का फैसला पक्ष में आने के बाद बोर्ड ने रेल मंत्रालय पर नए सिरे से इतना दबाव बनाया कि मंत्रालय न केवल पैसा देने के लिए नीतिगत तौर पर राजी हो गया बल्कि इस संबंध में इस्तेमाल की जा रही जमीन का सर्वे करवाने में भी दिलचस्पी ली। सर्वे का काम कमोबेश पूरा हो गया है। रेल विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक सर्विस चार्ज के रूप में दी जाने वाली धनराशि पर अंतिम फैसला दोनों पक्षों के अधिकारियों की बैठक के बाद ही तय होगा।
इस बीच छावनी बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि वो प्रापर्टी टैक्स का 33.5 फीसदी सर्विस चार्ज की मांग कर रहा है। अधिकारी के मुताबिक 79.1837 एकड़ भूमि पर उत्तर रेलवे और 26.28 एकड़ भूमि पर पूर्वोत्तर रेलवे काबिज है। छावनी ने 1982 से मार्च 2011 तक के बकाये की सूची बनाकर पूर्वोत्तर और उत्तर रेलवे को काफी पहले भेज दी थी। बोर्ड ने 31 जुलाई को उत्तर रेलवे से आठ करोड़ 26 लाख तीन हजार 436 रुपये और पूर्वोत्तर रेलवे से दोे करोड़ 56 लाख 81 हजार 488 रुपये की मांग की है। साथ ही सालाना एक करोड़ 60 लाख रुपये सर्विस चार्ज वसूलने का प्रस्ताव भी दिया है। अधिकारी ने लहरतारा ओवरब्रिज से माल गोदाम और लहरतारा रेलवे क्रासिंग से प्लेटफार्म नंबर नौ के पीछे तक का इलाका और रेलवे की सभी कालोनी (एईएन कालोनी को छोड़कर) छावनी की जमीन में होने का दावा किया है।
कोट
रेल मंत्रालय जमीन के संयुक्त सर्वे के बाद सर्विस चार्ज के भुगतान करने के लिए राजी हो गया है। सर्वे का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। इस संबंध में रेलवे ने जो कागजात मांगे थे वे उन्हें सौंप दिए गए हैं।-आरएच अवस्थी, मुख्य अधिशासी अधिकारी, छावनी परिषद

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