आदिवासियों से जमीन लेने पर उद्योगों में देंगे शेयर

Varanasi Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। बहुराष्ट्रीय कंपनियां आदिवासी इलाकों में उद्योग लगाने को लालायित हैं। अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामेश्वर ओरांव ने बताया कि इस बात का पूरा ख्याल रखा जाएगा कि उद्योग लगाने के लिए आदिवासियों से जमीन लेने वाली कंपनी उनको पर्याप्त मुआवजा और कंपनी में कुछ शेयर भी दे। मध्यप्रदेश के सिंगरौली, अनूपशहर, अमरकंटक और भोपाल के दौरे पर निकले ओरांव सारनाथ के केंद्रीय तिब्बती उच्च विश्वविद्यालय में अनुसूचित जनजाति के आरक्षण की स्थितियों का जायजा लेने पहुंचे और सब कुछ ठीक बताया।
उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, चिकित्सा, बिजली, पानी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी बुनियादी सुविधाओं का बेहद अभाव है। पर्याप्त विकास नहीं होने के कारण क्षेत्र में नक्सलवाद पनप रहा है। क्षेत्र की आबादी के हिसाब से आर्थिक विकास होने पर ही पलायन रुकेगा। तमाम कंपनियां से आदिवासी क्षेत्रों में उद्योग लगाने के प्रस्ताव मिले हैं। वनाधिकार कानून के तहत तमाम आादिवासियों को जमीन पर मालिकाना हक दिया गया है। वह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनकी भूमि को कंपनियां औने-पौने दामों में न ले लें। पूर्वोत्तर के आदिवासी इलाके को छोड़कर देश के अन्य इलाकों में अनुसूचित जाति के लोगों की स्थिति अच्छी नहीं है। केंद्र सरकार अब पिछड़े क्षेत्रों का समेकित विकास करने जा रही है। अखिल भारतीय खगरबंशी (खरवार) क्षत्रिय महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर बनारस, सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर और गाजीपुर में खरवार जाति का प्रमाणपत्र निर्गत नहीं करने की शिकायत की। प्रतिनिधिमंडल में शिवकुमार खरवार राही, अशोक कुमार खरवार, विश्वनाथ खरवार, अनिल सिंह खरवार, अरविंद सिंह खरवार आदि शामिल रहे।

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