सिर्फ डिग्रियां बटोरने से ज्ञान नहीं बढ़ता : प्रो. यशपाल

Varanasi Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. यशपाल ने कहा है कि विभिन्न विषयों का एक्सपर्ट होना तथा तमाम डिग्रियां रखना ज्ञान का द्योतक नहीं है। दुर्भाग्य है कि आज इसे ही ज्ञान मान लिया गया है। इससे शिक्षा आर्टिफिशियल हो जाती है। उसका ताल्लुक सिर्फ इम्तिहान तथा डिग्रियां बांटने तक सीमित रह जाता है। मानवीय मूल्यों तथा सरोकारों से इसका रिश्ता नहीं रह जाता है। वे मंगलवार को बीएचयू में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। प्रो. यशपाल विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने आए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि डिग्री बांटने मेें फिर नया खेल शुरू हो जाता है। इसमें तमाम लोगों को महारत हासिल है। नई-नई खोज करना विश्वविद्यालयों का धर्म है। यही तभी संभव है जब सब विधा की पढ़ाई एक साथ हो। आज तमाम डीम्ड यूनिवर्सिटी, मैनेजमेंट कालेज, कंप्यूटर संस्थान खोल दिए गए हैं। इनके दरवाजे शीशे के तथा फर्श मार्बल युक्त होते हैं। ऐसे संस्थानों से बेहतर शिक्षा की उम्मीद करना बेमानी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बीएचयू कभी इस नक्शे कदम पर नहीं चलेगा। प्रो. यशपाल ने कहा कि महान विश्वविद्यालय वही बन सकता है जो केवल सूचना पर न चले। इससे नई सोच नहीं आ सकती। यह टाक्सिक, हानिकारक तथा अनुपयोगी है। कोशिश होनी चाहिए कि सूचनाओं को मानवीय रिश्ते से जोड़ा जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। आज भी शिक्षक पुराने जमाने के नोट्स से काम चलाते हैं। ऐसे लोगों को बच्चों से प्रेरणा लेनी चाहिए जो शिक्षक प्रशिक्षण के लीडर होते हैं। पढ़ने-पढ़ाने वाले दोनों एक दूसरे से सीखते हैं। आज शिक्षा का स्वरूप इतना बदल गया है कि शिक्षक की जरूरत नहीं रह गई है। बहुत सारे तरीकों से ज्ञान अर्जित किया जा सकता है। लेकिन, जब तक शिक्षक का आत्मीय लगाव बच्चों को नहीं मिलेगा तब तक सही शिक्षा हासिल नहीं हो सकती। उन्होंने प्रश्न किया कि बीएचयू आईटी को आईआईटी क्यों बना दिया गया। आईआईटी की दीवारों में छेद करने की जरूरत है ताकि अन्य विधाओं का भी वहां अध्ययन हो सके।

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