प्रशिक्षण पूर्वांचल में और नौकरी गैर प्रांतों में

Varanasi Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। पूर्वांचल में व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने वालों को काम के लिए गैर प्रांतों में जाना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए कि जिन ट्रेड्स की ट्रेनिंग उन्हें दी जा रही है उनसे संबंधित काम यहां की बजाय अन्य प्रांतों में ज्यादा मिल रहा है। बीएचयू की ओर से कराए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि यहां से प्रशिक्षण लेकर छात्र जहां भी जा रहे हैं वहां बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि व्यावसायिक शिक्षा का पाठ्यक्रम बदल कर उसे क्षेत्रीय जरूरतों के मुताबिक किया जाए। ऐसा होने पर युवाओं को अपने घर में काम मिलेगा। दूसरे उनके लिए काउंसिलिंग की मुकम्मल व्यवस्था हो जाए तो उनकी क्षमता और प्रतिभा का बेहतर इस्तेमाल पूर्वांचल के विकास में हो सके।
गोरखपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, भदोही, चंदौली एवं सोनभद्र सहित पूर्वांचल के 11 जिलों में 4000 लोगों पर किए गए सर्वे में 62 फीसदी युवा 22 से 42 वर्ष के बीच रहे। इनमें से 31 फीसदी ने कक्षा आठ तक पढ़ाई की थी। 18 प्रतिशत दसवीं से लेकर स्नातक, 12 फीसदी एमसीए, एमबीए तथा अन्य तकनीकी शिक्षा तथा एक प्रतिशत युवाओं के पास स्नातकोत्तर से आगे की शिक्षा है। जिन लोगों ने कम पढ़ाई की है, उनमें से 80 प्रतिशत ने एसी, गाड़ी मरम्मत, जरदोजी और अन्य हुनरमंद कामों में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। यह बात भी सामने आई कि हुनर के काम में मुस्लिम वर्ग के युवा ज्यादा हैं। सर्वे में पता चला कि 38 प्रतिशत युवाओं ने सोच समझकर हुनर का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। 17 प्रतिशत युवाओं को अपने प्रशिक्षण वाले ट्रेड में काम नहीं मिल पाता है। इससे उनका काम में मन नहीं लगता है और वे यहां से पलायन कर जाते हैं। 11 प्रतिशत को पसंदीदा नौकरी मिलती है और 10 फीसदी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने व्यवसाय में लग जाते हैं।
सर्वे का नेतृत्व कर रहे कृषि अर्थशास्त्र के प्रो. साकेत कुशवाहा का कहना है कि पूर्वांचल में कोई काउंसिलिंग सेंटर नहीं है। इस वजह से युवाओं का सही मार्गदर्शन नहीं हो पाता और वे दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, राजस्थान, गुजरात, मुंबई, हैदराबाद, बंगलूरू, चेन्नई आदि जगहों के लिए पलायन कर जाते हैं। इससे गांवों में ठीक से खेती नहीं हो पाती है। सामाजिक अपराध बढ़ जाता है। यह जरूर है कि वे कमाकर पैसे लाते हैं और घर मकान ठीक से बन जाता है।

सलाह
युवाओं को जॉब साइकिल का ध्यान रखना होगा। हर पांच साल में यह साइकिल बदल जाती है। अंधाधुंध एक ही ट्रेड की ओर भागने से बचना चाहिए।
सरकार को पूर्वांचल में उद्योग-धंधे स्थापित करने की दिशा में पहल करनी चाहिए। इन्हें पर्याप्त सुरक्षा मिले तथा संसाधनों की भरपूर उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
शिक्षण संस्थाएं रोजगारपरक शिक्षा दें न कि केवल डिग्रियां बांटें।

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