विज्ञापन

अमर उजाला के नेत्रदान महादान जनजागरण कार्यक्रम में चिकित्सकों ने समझाया महत्व

Varanasi Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
वाराणसी। कर्मकांड में नेत्रदान को लेकर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है। शव न मिलने की स्थिति में जब आटे के पिंड का अंतिम संस्कार किया जा सकता है तो फिर नेत्रदान ही क्यों, साधु-संत, संन्यासियों को तो अपना पूरा शरीर ही दान कर देना चाहिए। इससे न सिर्फ अंधत्व की समस्या का समाधान होगा बल्कि चिकित्सा शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए भी उत्तम होगा।
विज्ञापन
ये बातें गंगा सेवा अभियानम के सार्वभौम संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को अमर उजाला के तत्वावधान में आयोजित नेत्रदान महादान जनजागरण गोष्ठी में अपने आशीर्वचन में कहीं। अमर उजाला के चांदपुर स्थित कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देशभर में जितने संत हैं, यदि वे ही एक साथ नेत्रदान का संकल्प ले लें और उनके अनुयायी उनके मरणोपरांत नेत्रदान कराने के लिए तत्परता दिखाएं तो अंधता निवारण के लिए इस देश को लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। उन्होंने कहा कि केदार घाट स्थित श्रीविद्यामठ में होने वाले पाक्षिक शास्त्रार्थ सभा में नेत्रदान-महादान विषय पर शास्त्रार्थ का आयोजन किया जाएगा। द्वादशी 28 अगस्त को शास्त्रार्थ होगा। हमारे धर्मशास्त्र की प्रत्येक पंक्ति किसी न किसी रूप में यही संदेश देती है कि हमें अपना जीवन दूसरों के लिए जीना चाहिए। दधीचि ने अपनी अस्थियां दान कर दीं। शिवी ऋषि ने कपोत की रक्षा के लिए शरीर का मांस टुकड़ा-टुकड़ा दान दे दिया था। इससे पूर्व गोष्ठी में उपस्थित चिकित्सकों ने 29 जुलाई 2009 में डा. अनुराग टंडन के सहयोग से आईएमए के आई बैंक की शुरुआत के बाद से अब तक 99 लोगों का अंधत्व दूर करने की जानकारी देने से लेकर नेत्रदान की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से समझाया। जनजागरण गोष्ठी में डा. श्रीप्रकाश मिश्र अध्यक्ष काशी विद्वत परिषद, डा. संजय राय निर्वाचित अध्यक्ष आईएमए, डा. ओपी तिवारी आईएमए, डा. अनुराग टंडन वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ, धर्मवीर सिंह ग्रंथी गुरुद्वारा नीचीबाग, घनश्याम जैन, राजेश भाटिया, मयंक शेखर मिश्र, विकास दुबे, राजेश सिंह, कुतुबद्दीन खान ने भी अपने-अपने विचार रखे। संचालन बद्री विशाल ने किया।
इनसेट
ऐसे पूरी होती है प्रक्रिया
वाराणसी। नेत्रदान के लिए अब आईएमए और बीएचयू आई बैंक मिलकर काम कर रहे हैं। प्रचार-प्रसार का काम आईएमए ने अपने ऊपर लिया है। बीएचयू में टीम और किट हमेशा तैयार रहती है। बीएचयू किसी कारण से टीम नहीं भेज पाती है तो डा. अनुराग टंडन स्वयं जाकर यह काम अपनी टीम के साथ संपादित करते हैं। एक दशक पहले पूरी आंख निकाली जाती थी। अब सिर्फ कार्निया निकाली जाती है। चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती। शव से रक्त का नमूना भी लिया जाता है। कार्निया को निकालने के बाद छह घंटे के भीतर एमके मीडिया में रखा जाता है। ऐसा कर उसे अगले छह दिन के लिए सुरक्षित कर लिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी पैसे का कोई लेनदेन नहीं होता है। किसकी आंख किसको लगाई जा रही है, यह पूर्णतया गोपनीय होता है ।

सचित्र कोड
कानून के अनुसार जीते जी आंख नहीं दान की जा सकती। मृत्यु के छह घंटे बाद तक आंखें जीवित रहती हैं। कार्निया ही एकमात्र ऐसा अंग है जहां रक्त नहीं पहुंचता। कार्निया सैकड़ों वर्षों तक जीवित रह सकती है - डा. अनुराग टंडन
बीएचयू के आई बैंक में 2003 से पांच वर्षों में सिर्फ 27 कार्निया ही प्लांट किए जा सके थे। ब्लाइंड रजिस्टर में संख्या सैकड़ों पहुंच गई थी। ब्लाइंड रजिस्टर के अनुरूप लोगों में जागरूकता फैलाई जाए - डा. ओपी तिवारी, कार्डियोलाजिस्ट
कुछ सरल नंबर लिए गए जिनपर नेत्रदान के लिए सूचना दी जा सकती है। आईएमए काल रिसीव करता है। आईएमए की एंबुलेंस सीधे बीएचयू पहुंचेगी। वहां से डाक्टरों की टीम मौके पर जाएगी
- डा. संजय राय, आईएमए
कर्मकांड ने कहीं मना नहीं किया है कि नेत्रदान नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में न तो नेत्रदान की बारे में कहा गया है न निषेध किया गया है। हमारे धर्म ग्रंथ में जो निषेध नहीं होता, उसे मानव कल्याण के लिए स्वीकार करना चाहिए - पं. श्रीप्रकाश मिश्र, अध्यक्ष काशी विद्वत परिषद
हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि जिनका निषेध नहीं किया गया हो उसे मानव कल्याण के लिए स्वीकार कर लेना चाहिए। गुरु वाणी में भी स्पष्ट कहा गया है कि दूसरों के लिए ही जीना सच्चा जीवन है। - धरमवीर सिंह, ग्रंथी गुरुद्वारा नीचीबाग
नेत्रदान करने से ज्यादा जरूरी है कि हम नेत्रदान कराने में रुचि लें। मृत्यु के बाद जो माहौल होता है उसमें परिवार के सदस्य से अपेक्षा करना कि वह पहल करेगा, थोड़ा अव्यवहारिक लगता है। पहल तो पड़ोसियों को करनी होगी - घनश्याम जैन, व्यापारी नेता
नेत्रदान जागरूकता को इतना प्रभावी बनाना है कि बनारस जिले से ही इतने नेत्रदान हों कि संपूर्ण पूर्वांचल में कार्निया की खराबी के कारण अंधता के शिकार लोगों का जीवन रौशन किया जा सके।
- राजेश भाटिया, व्यापारी नेता

प्वाइंटर

एक आंख से कार्निया निकालने में पांच मिनट लगता है।
मोतियाबिंद की दिक्कत लेंस की खराबी के कारण होती है।
प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत कार्निया कभी भी खराब नहीं होती।
आंख की काली पुतली पर एक झिल्ली होती है जिसे कार्निया कहते हैं।
नियमत: नेत्रदान में यह शर्त नहीं लागू होती कि आंख अमुक को ही लगे।
न्यूनतम तीन वर्ष से लेकर सौ वर्ष के लोगों के नेत्र से कार्निया निकाले गए हैं।
सीवियर इंफेक्शन, एड्स और हेपेटाइटिस-बी से मरने वालों का नेत्रदान स्वीकार नहीं।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Jammu

J&K: शोपियां से अगवा 3 एसपीओ की आंतकियों ने की हत्या, 1 को किया रिहा

जम्मू कश्मीर के शोपियां से शुक्रवार सुबह 4 पुलिसवालों के अपहरण की खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि जिन पुलिसवालों का अपहरण हुआ है उनमें 3 एसपीओ यानी स्पेशल पुलिस अफसर थे।

21 सितंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

RSS प्रमुख पर भड़के स्वामी अग्निवेश, कह डाला ये

कुछ दिन पहले ही मारपीट का शिकार हुए स्वामी अग्निवेश ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर जुबानी हमला किया। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत को मॉब लिंचिंग पर बात करना शोभा नहीं देता। सरकार बीजेपी की है तो ऐसी हरकतें करने वालों को सजा क्यों नहीं मिलती।

20 सितंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree