खुदाई में मिली चार फुट की चतुर्मुखी प्रतिमा

Varanasi Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
सेवापुरी। काशी और आसपास के प्राचीन मूर्ति शिल्प पर नए सिरे से रोशनी पड़ने के आसार हैं। सेवापुरी ब्लाक के दिलावलपुर गांव में खुदाई के दौरान मिली पत्थर की चतुर्मुखी प्रतिमा एक समृद्ध अतीत का आइना बनेगी। शिल्प रचना और आदमकद आकार के आधार पर इस प्रतिमा के शुंग या गुप्तकालीन होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल प्रतिमा मिलने से उत्साहित बस्तीवालों ने जहां मंदिर निर्माण शुरू करा दिया है, वहीं पुरातत्वविद् कार्बन डेटिंग से उसके कालखंड का अध्ययन करने में जुट गए हैं।
दिलावलपुर बस्ती में तालाब के भीटे में दबी जिस प्रतिमा के पास शादियों के बाद लाल जोड़ों के हल्दी के कंगन छुड़ाए जाते रहे हैं, वहां अब अतीत की परतें खुलने की उम्मीद जग गई है। पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह की पत्नी सुषमा को इस बार जब प्रधानी मिली तभी उन्होंने उस प्रतिमा को मंदिर में स्थापित करने का संकल्प ले लिया था। पखवारे भर पहले बस्तीवालों ने प्रतिमा के शीर्ष भाग को जब चबूतरे पर स्थापित करने की कोशिश की तो नए रहस्य सामने आने लगे। काफी गहराई तक खोदे जाने के बाद भी जब प्रतिमा का पूरा स्वरूप सामने नहीं आ सका तब उत्सुकता बढ़ गई। अंतत: ग्रामीणों ने खुदाई कराई तो चार फुट से भी ऊंची प्रतिमा निकली। इस प्रतिमा में चार स्वरूप मिले हैं। जानकारी मिलने के बाद कालिकाधाम पीजी कालेज के पुरातत्वविद् डॉ. राजपाल सिंह टीम के साथ बस्ती पहुंच गए। आसपास के गांवों के लोग भी प्रतिमा देखने के लिए पहुंच रहे हैं। पुरातत्वविद् राजपाल ने गांववालों के सामने उस प्रतिमा के बेहद प्राचीन होने की उम्मीद जताई। प्रतिमा के चार स्वरूपों में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और आदिशक्ति की मुखाकृति होने का अनुमान है लेकिन इस पर अभी शोध होना बाकी है कि प्रतिमा किस काल की हो सकती है।

कोट
दिलावलपुर में मिली चतुर्मुखी प्रतिमा शुंगकाल या गुप्तकाल की भी हो सकती है। इस संबंध में बीएचयू के पुरातत्वविदें से भी संपर्क साधा गया है। कार्बन डेटिंग के आधार पर उसके कालखंड का निर्धारण किया जाएगा। - डॉ. राजपाल सिंह, पुरातत्वविद् (कालिका धाम पीजी कालेज)

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