बीएचयू सहित तीन विश्वविद्यालयों पर दर्ज होगा मुकदमा

Varanasi Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। गंगा और अन्य नदियों में सीवर गिराने पर हाईकोर्ट के सख्त होने के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब हरकत में आ गया है। बोर्ड ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ को नोटिस भेजा है। विद्यापीठ और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को अवजल शोधन के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए पत्र लिखा है वहीं बीएचयू प्रशासन से पूछा है कि 1.8 एमएलडी अतिरिक्त अवजल के लिए क्या व्यवस्था है। बोर्ड को इन तीनों विश्वविद्यालयों से कोई जवाब नहीं मिला है। बोर्ड अब इन तीनों विश्वविद्यालयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में है।
गौरतलब है कि नदियों में गिरते अवजल को लेकर हाईकोर्ट सख्त है। गंगा में अवजल जाने के मामले में हरिचेतन ब्रह्मचारी महाराज बनाम उत्तर प्रदेश सरकार तथा अन्य मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में प्रतिमाह हो रही है। उच्च न्यायालय ने गंगा नदी में प्रदूषण फैलाने के लिए उत्तरदायी उद्योगों, स्थानीय निकायों, संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक, अभियोजनात्मक कार्यवाही करने का निर्देश उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिया है। गंगा और वरुणा नदी में गिर रहे अवजल को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसबी सिंह ने शहर के चार विश्वविद्यालयों को यह नोटिस जारी किया है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय और संपूर्णानंद संस्कृत को कैंपस के अवजल को शोधन के लिए एसटीपी लगाने के लिए पत्र लिखा था। इसमें से एक मात्र तिब्बती विश्वविद्यालय ने एसटीपी लगाने का प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड को भेजा है।
बीएचयू प्रशासन ने पूर्व में बोर्ड को अवगत कराया था कि उसके यहां से प्रतिदिन 9.8 एमएलडी सीवेज निकलता है। उनका सीवेज भगवानपुर स्थित एसटीपी में शोधित होता है। बीएचयू के इस जवाब को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने कई सवाल खड़े कर जवाब मांगा है। इसमें पूछा गया है कि भगवानपुर स्थित एसटीपी की कुल क्षमता महज आठ एमएलडी प्रतिदिन की है। ऐसे में बीएचयू शेष 1.8 एमएलडी सीवेज के ट्रीटमेंट के लिए क्या कर रहा है। किन शर्तों पर नगर निगम अपने एसटीपी से बीएचयू के अवजल का शोधन कर रहा है। इस अनुबंध से अवगत कराने को भी लिखा है। इसके साथ ही यह भी पूछा कि बीएचयू कब और कितनी क्षमता का एसटीपी लगाएगा। बीएचयू की तरफ से भी बोर्ड को कोई जवाब नहीं मिला है।

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