विज्ञापन

बिरजू महाराज बनारस के पर ओंकारनाथ ठाकुर कौन?

Varanasi Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
वाराणसी। बिरजू महाराज बनारस घराने के कलाकार हैं। पं. बलवंत भावरंग भट्ट भले ही पद्मश्री हों लेकिन जिला प्रशासन को उनको नहीं जानता। उनको ही क्या उनके गुरु पद्मश्री पं. ओंकारनाथ ठाकुर को भी नहीं जानता। बनारस बाज तबले के प्रवर्तक राम सहाय से भी जिले का संस्कृति विभाग परिचित नहीं है। जिला प्रशासन की बेवसाइट को देखने पर ऐसी तमाम गलतियों से दो-चार होना पड़ता है।
विज्ञापन
पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज कथक के लखनऊ घराने के कलाकार हैं। उनके पूर्वज इलाहाबाद के हंडिया तहसील के थे। बनारस घराने से उनका रिश्ता भले ही नहीं हो लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें अपना मानता है। जिले की वेबसाइट पर वायोलिन वादक पद्भूषण एन राजम का जिक्र है। देश की चोटी की कलाकार होने के साथ-साथ वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में प्राध्यापिका थीं। इस विभाग के संस्थापकों में शुमार पं. ओंकारनाथ ठाकुर ने गायकी के बल पर उन्होेंने मुसोलिनी को अनिद्रा से मुक्ति दिलाई थी। प्रशासन उनको बनारस का कलाकार नहीं मानता। उनके शिष्य पं. बलवंत भावरंग भट्ट को भी प्रशासन बनारस का नहीं मानता जबकि वह इसी शहर में निवास करते हैं। बनारस में तबला लखनऊ से आया। पं. राम सहाय उसे सीख कर काशी आए थे। उन्होंने गुरुदक्षिणा में गुुरु से सीखा तबला नहीं बजाने का वचन दिया था। लिहाजा दो साल तक मंच से परे रहकर उन्होंने ‘बनारस बाज’ का स्वरूप तैयार किया। उनके रचे बोलों की बदौलत आज बनारस का तबला दुनिया में चढ़कर बोलता है। मगर प्रशासन को उनकी याद नहीं। वेबसाइट पर कंठे महाराज, पद्मविभूषण किशन महाराज, पद्मविभूषण सामता प्रसाद गोदई महाराज का जिक्र है लेकिन राम सहाय, अनोखे लाल के बारे में कुछ नहीं लिखा गया। रामानंदाचार्य, तुलसीदास, कबीर दास तो वेबसाइट पर हैं लेकिन रविदास, बल्लभाचार्य को संस्कृति विभाग भूल गया है। भारतेंदु बाबू, प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, हजारी प्रसाद द्विवेदी का नाम है लेकिन रामचंद्र शुक्ल को भुला दिया गया है। जिले के राजनेताओं की सूची में लाल बहादुर शास्त्री, भगवानदास, पं. कमलापति त्रिपाठी जैसे दिग्गजों के बीच लोकबंधु राजनारायण को जगह नहीं मिल पाई है। प्रशासन ने एनी बेसेंट, महामना मदन मोहन मालवीय, सीताराम मौर्य, महावीर सिंह आदि स्वतंत्रता सेनानियों को सूची में उनका भी नाम लिख प्रायश्चित जरूर कर लिया है। उनके बारे में लिखा है कि उन्होंने 1942 के आंदोलन में भाग लिया। गंगापुर के रहने वाले थे।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Varanasi

यूपीः खेत के चारों तरफ लगे तारों में दौड़ाया करेंट, चपेट में आए किशोर की मौत

यूपी के आजमगढ़ में सब्जी के खेत के चारों ओर कटीले तार लगाकर करेंट दौड़ाए जाने से बुधवार को एक किशोर की मौत हो गई जबकि एक बालक झुलस गया।

17 अक्टूबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

वाराणसी में लगे पोस्टर, ‘गुजराती नरेंद्र मोदी भारत छोड़ो’

गुजरात में यूपी और बिहार के लोगों पर होने वाले हमलों को लेकर वाराणसी में जगह-जगह पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। पोस्टर में पीएम मोदी को गुजराती बताते हुए उन्हें गुजरात वापस जाने की चेतावनी ही गई है।

9 अक्टूबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree