चित्रकार के लिए एकाग्रता और साधना जरूरी

Varanasi Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
रोहनिया। उत्तर प्रदेश भोजपुरी संघ द्वारा इंस्टीट्यूट आफ फाइन आर्ट्स, अखरी में शनिवार को आयोजित चित्रकला व्याख्यान में प्रख्यात चित्रकार और लेखिका इला देवपाल ने कहा कि मैं जिस मुकाम पर पहुंची हूं, उसका श्रेय महान चित्रकार एमएफ हुसैन को जाता है। मैं एक शिक्षिका बनना चाहती थी लेकिन हुसैन की चित्रकारी से ऐसी प्रेरणा मिली कि मेरी दिशा ही बदल गई। बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि चित्रकार में एकाग्रता, कुशाग्रता और साधना का होना बहुत जरूरी है। तभी वह एक सफल चित्रकार बन सकता है।
कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद इला ने कैनवस पर चित्र बनाकर विद्यार्थियों को चित्रकला की बारीकियां बताईं। उन्होंने कहा कि चित्रकार अंतरात्मा से महसूस करे, उसे हूबहू तूलिका से अभिव्यक्त करे तो उसकी कला स्वत: जीवंत हो उठती है। उनकी पुस्तक स्टेलिंग गाड्स का विमोचन रविवार को बीएचयू के भारत कला भवन में किया जाएगा। इस दौरान उनकी बेटी अनुराधा पाल ने छात्र-छात्राओं को तबला वादन की कला सिखाई। संस्था के निदेशक डा. अवधेश सिंह ने मुख्य अतिथि को कला मंजरी अलंकरण से सम्मानित किया। स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. एके सिंह ने किया। कार्यक्रम में भोजपुरी संघ के प्रांतीय महासचिव अपूर्व नारायण तिवारी, महेंद्र सिंह, रामानंद तिवारी, डा. अनिल सिंह, डा. विजय बहादुर सिंह, पुष्पा तिवारी, अजय, शालिनी एवं राजकुमार आदि उपस्थित थे।

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