उफनाई लहरों पर महाकाल के नाम सजी शाम

Varanasi Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। बनारस घराने की बाट, तिहाइयों, गतों और टुकड़ों के साथ वृहस्पतिवार की शाम मशानेश्वर का मुक्तांगन चहुंदिशि स्वर-ताल का झनकार से झंकृत हो उठा। एक शाम महाकाल के नाम से आयोजित संगीत निशा अघोर चतुर्दशी के उपलक्ष्य में हरश्चिंद्र घाट पर हुई। लोक धुनों, शास्त्रीय बंदिशों और एक से बढ़कर एक रागों पर देर रात तक लोग झूमते रहे। यह महफिल गंगा की लहरों के मध्य बजड़े पर किया गया था।
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जपो मन भोला नाम रे... के बोल पर सोरभ देव ने स्तुति से शुरुआत की। इनके बाद लोक गायिका कुसुम पांडेय ने एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति की। डोली लेइके अइले सजनवा, होई पिया से मिलनवां.... के बोल पर सुरों को सजाकर उन्होंने वाहवाही लूटी। इनके बाद राजन तिवारी ने पेश किया- मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है...। श्रद्धा पांडेय की प्रस्तुति- जब भक्त नहीं होगा भगवान कहां होगा... को संगीत प्रेमियों ने मुक्त कंठ से सराहा। गोरखपुर की अंजलि मिश्र की प्रस्तुति के लोग कायल हो गए। आइल बानी काशी पिया त सबके भजनियां सुनइबे करब....। इसके अलावा उन्होंने फरमाइशी कजरी, भजन भी पेश किए। कुबेर नाथ मिश्र ने तबले पर बाट , तिहाइयों और छोटी-छोटी गतों से हर किसी को मुग्ध कर दिया। शिल्पी बनर्जी ने गंगा पर आधारित नृत्य पेश कर वाहवाही लूटी। इससे पहले भोजपुरी लेखक जितेंद्र सिंह जीत और कवि तारकेश्वर मिश्र राही को सम्मानित किया गया। संचालन कौशल किशोर मिश्र ने किया। अंत में कलाकारों को आशीर्वचन कपाली बाबा ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन एसएन राय ने किया।
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