उल्टी-दस्त से भाई-बहन की मौत

Varanasi Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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सेवापुरी/रामेश्वर। उल्टी-दस्त से पीडि़त भाई-बहन की सोमवार की सुबह मौत हो जाने पर ग्रामीण भड़क गए। सेवापुरी ब्लाक के बरेमा धुसापुर गांव में इन बच्चों की मौत के बाद ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग को फोन किया, मगर जब किसी ने फोन नहीं उठाया तो उन्होंने डीएम के मोबाइल पर एसएमएस भेजकर इसकी सूचना दी। यही नहीं, मौके पर जब दो घंटे बाद चिकित्सकों की टीम पहुंची तो ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया। ग्रामीण सीएमओ और अन्य चिकित्सकों पर लापरवाही बरतने का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे थे। बाद में लोगों के समझाने पर वे मान गए। इस गांव में अब भी 13 लोग उल्टी-दस्त से पीडि़त हैं।
ग्रामीण कल्लू राम का पुत्र रोहित (13) और पुत्री कुस्तीना (8) का उल्टी-दस्त होने पर रविवार को रामेश्वर स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार कराया गया। चिकित्सक ने दवा देकर दोनाें को घर भेज दिया। इस बीच सोमवार की सुबह साढ़े पांच बजे दोनाें की हालत गंभीर हो गई। घर वाले उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे तभी दोनाें ने दम तोड़ दिया। दोनों मासूमों की मौत के बाद गांव में कोहराम मच गया। ग्रामीण दिनेश राम, अशोक कुमार, राजकुमार आदि का आरोप था कि पांच दिन पूर्व लालमन राम की पुत्री सृष्टि (4) की भी उल्टी-दस्त से मौत हो गई थी। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी गई थी, लेेकिन कोई झांकने तक नहीं आया। ग्रामीणाें का कहना था कि पेयजल के लिए हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। चूंकि आसपास गंदगी पसरी रहती है, ऐसे में यही पानी बीमारी का कारण बन रहा है।
बच्चों की मौत की सूचना मिलने के बाद एसडीएम एसके सिंह, खंड विकास अधिकारी आरएस वर्मा, एसीएमओ पीएन रावत बरेमा धुसापुर गांव पहुंचे और पीडि़त परिवार को विभाग की ओर से एक हजार रुपये दिए। गांव की अनीता, मुन्नी, लालमनी, नारायण, सतना, जियालाल 13 अब भी उल्टी-दस्त से पीडि़त हैं। सेवापुरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल अफसर डा. अंबुज गुप्ता के मुताबिक गांव के कई लोग गैस्ट्रो इंट्रोटाइटिस से पीडि़त हैं। दोनाें बच्चाें की मौत भी इसी बीमारी से हुई।
कोट-
मुझे सुबह साढे़ सात बजे गांव में दो बच्चाें की मौत की सूचना मिली थी। सेवापुरी के प्रभारी चिकित्साधिकारी को तत्काल गांव में जाने को कहा गया था। पांच दिन पूर्व गांव में एक बच्ची की मौत हुई थी, इसकी जानकारी किसी ने नहीं दी-डा. जंगबहादुर, नोडल अधिकारी, संक्रामक सेल
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दोपहर बाद डाक्टर रहते ही नहीं
वाराणसी। समय रहते अगर डाक्टरों की टीम ने पीडि़तों का उपचार कर दिया होता तो संभवत: बरेमा धुसापुर गांव के दो मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। इसके पहले भी गैस्ट्रो इंट्रोटाइटिस से लोगाें की जान जा चुकी है, लेकिन हर बार स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। हरहुआ ब्लाक के अनौरा गांव में पिछले पखवारे एक महिला की मौत हो गई थी। गांव में कई लोग बीमार थे, लेकिन सूचना देने के दो दिन बाद चिकित्सकों की टीम पहुंची थी। शनिवार को चोलापुर के देवरिया गांव में फूड प्वायजनिंग से 37 लोग बीमार हो गए थे। उस दौरान भी पीएससी पर चिकित्सक नदारद थे। ग्रामीणों के मुताबिक अधिकांश ग्रामीण अस्पतालाें में दोपहर डेढ़ बजे के बाद चिकित्सक मिलते ही नहीं। उच्चाधिकारियों को इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
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शोक में बंद रहा विद्यालय
सेवापुरी। दो बच्चाें की मौत के बाद कचपतेर गांव स्थित आदर्श कान्वेंट स्कूल बंद कर दिया गया। स्कूल में हुई शोकसभा में शिक्षकाें और बच्चों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों भाई-बहन इसी स्कूल में पढ़ते थे। शिक्षकों का कहना था कि दोनाें बच्चे पढ़ने में तेज और शांत स्वभाव के थे।

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