अफसरों की मनमानी का नतीजा है करसड़ा की घटना

Varanasi Updated Sun, 12 Aug 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। कसरड़ा उपकेंद्र के मां शीतला धाम फीडर को वर्ष 2008 में सूखा के कारण 14 घंटे विद्युत आपूर्ति का आदेश दिया गया था। सूखा बीतने के बाद भी यह व्यवस्था जारी रही। विद्युत संकट उत्पन्न हुआ तो मनमानी तरीके से इस आदेश को रद कर दिया गया और ग्रामीण शिड्यूल कर दिया गया। अचानक आपूर्ति ठप होने पर गुस्सा भड़कना स्वाभाविक था। पूर्वांचल में अफसरों की इस तरह की जगह-जगह देखने को मिलेगी।
नेताओं और अफसरों के दबाव में जारी होने वाले शिड्यूल में अगले आदेश तक निर्धारित आपूर्ति देने का जिक्र रहता है। अगला आदेश आता नहीं है। सालों वही शिड्यूल चलता रहता है और उपभोक्ता विशेष आदेश को अधिकार समझ लेते हैं। यदि कोई शिकायत करे या दूसरे गांवों को उस फीडर से जोड़ने की मांग करे तब आदेश पर दोबारा विचार होने लगता है। ऐसे में बिजली पाने वालों को लगता है कि उनके साथ राजनीति की जा रही है और बखेड़ा खड़ा हो जाता है। डुबकिया कंट्रोल रूम में पहले इस तरह के आदेश कंप्यूटर में फीड किए जाते थे। हर महीने समीक्षा होती थी। जानकारों का कहना है कि कंप्यूटर खराब हो गया है। ऐसे में आदेशों का हिसाब रखना भी संभव नहीं है। जिस फीडर पर ज्यादा बिजली मिलती है, उससे लोग जंफर खोलवा कर अपने गांवों को जोड़वा देते हैं। यह सिलसिला बढ़ता ही रहता है। ग्रिड फेल होने के बाद इस ओर अधिकारियों का ध्यान गया और आपूर्ति का शिड्यूल छह घंटे किया गया लेकिन बदहाल विद्युत वितरण व्यवस्था के कारण गांवों में तीन से चार घंटे ही बिजली पहुंच रही है। अचानक 14 घंटे की बजाय तीन-चार घंटे बिजली मिलने पर करसड़ा में ग्रामीण आग बबूला हो गए। पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्रा का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में धीरे-धीरे आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। फिलहाल आठ घंटे किया जा रहा है और जल्द ही उसे बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया जाएगा।

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