मुखिया ही नहीं, कैसे सुधरे यातायात व्यवस्था

Varanasi Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। शहर की गंभीर समस्या जाम से उबरने का यातायात विभाग के पास कोई कारगर उपाय नहीं है। सुगम यातायात व्यवस्था के लिए
शासन ने 2008 में जिले में एएसपी यातायात का पद सृजित किया। यहां जाम का झाम ऐसा है कि यहां इस पद पर कोई रहना नहीं चाहता है। यही वजह है कि पिछले तीन वर्षों में यहां दो माह से अधिक समय तक का कार्यकाल किसी एएसपी यातायात का नहीं रहा। मौजूदा समय में इसका प्रभार एसपी सिटी के पास है।
बसपा शासन में वाराणसी में एएसपी यातायात का पद सृजित होने के बाद पहले एएसपी ट्रैफिक जुगुल किशोर बनाए गए थे। इनका कार्यकाल करीब आठ महीने का रहा। इसके बाद डीपीएन पांडेय ने कार्यभार संभाला। वह करीब डेढ़ साल तक यहां रहे। उनके स्थानांतरण के बाद से ही यातायात व्यवस्था पटरी से उतर गई। एसपी सिटी के भरोसे यातायात विभाग चलता रहा। विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रदीप गुप्ता की तैनाती की गई। करीब दो महीने सेवा देने के बाद उनका स्थानांतरण मिर्जापुर के लिए कर दिया गया। तत्कालीन एसपी सिटी मान सिंह चौहान को विभाग की बागडोर दी गई। चुनाव बाद नई सरकार ने मनोज कुमार सोनकर को एएसपी यातायात बनाकर भेजा। करीब दस दिनों बाद ही उनका तबादला कानपुर के लिए कर दिया गया। अप्रैल के बाद इस पद पर किसी की तैनाती नहीं की गई। चार महीने से एसपी सिटी संतोष सिंह प्रभारी के रूप में काम देख रहे हैं। बिना मुखिया के यातायात व्यवस्था अपेक्षित रूप से नहीं सुधर पा रही है। आला अफसरों के फरमान का भी विभाग पर कोई असर नहीं है। विधानसभा चुनाव के पहले तय किया गया था कि चौराहों से सौ मीटर के अंदर स्टैंड नहीं होगा लेकिन अब तक इसका अनुपालन नहीं किया गया।

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