अनाथालय में इकलौते राजा भैया की सजेगी कलाई

Varanasi Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। उन्हें न तो जन्म देने वाली अपनी मां का पता है न पिता का। पैदा होते ही लोकलाज के भय से सड़क की पटरियों, पुलों और पेड़ों के नीचे फेंक दी जाने वाली वो 15 बहनें गुरुवार को मुहूर्त में अपने इकलौते राजा भैया को राखी बांधेंगी। जी हां, हम बात कर रहे हैं काशी अनाथालय में जिंदगी बसर करने वालीं लड़कियों की। खून का रिश्ता न होते हुए भी इस दौर में उनके दिलों में भाई-बहन के प्यार की खुशियां और जेहन में पल रहे अपनेपन के एहसास को नजीर के तौर पर लिया जाएगा।
करीब सात साल पहले पुलिस की गाड़ी से लाया गया एक दिन का बच्चा आज तमाम अनाथ बहनों का अकेला भाई बन खुशी भी बांटता है और दर्द भी। पांच से लेकर 40 वर्ष तक के 16 सदस्यों के इस कुनबे की आपसी मोहब्बत ने यतीमखाने की परिभाषा तक बदल डाली है। छह साल पहले अनाथालय के गेट पर छोड़ी गई क्षमा (6) की खुशी रक्षाबंधन पर इस बार बर्थडे पड़ने से दो गुना बढ़ गई। इस मौके पर उसने दूसरी बहनों अनामिका उर्फ रानी (7), प्रिया (7), पीतांबरी (4), मीता (4) के साथ मिलकर राजा भैया के लिए राखी खुद तैयार की है। होनहार क्षमा कक्षा की मानीटर होने की वजह से भी तैयारी की अगुवाई कर रही है। गीता (40), लीला (25), मीना (24), उषा (20), प्रियंका (16), सरिता (15), प्राची (14), सुजाता (12), कीर्ति (12) ने भी राजा भैया के लिए राखी बनाई है। दोपहर बाद एक दानदाता ने अनाथालय में सपने सजा रहे उन भाई-बहनों के लिए नए कपड़े भी पहुंचा दिए। मां की भूमिका निभाने वाली वहां की अधीक्षिका राम कुमारी तिवारी सोनपपड़ी वाली मिठाई मंगाएंगी। राजा भैया इससे गदगद है कि बहनों की राखी से उसकी कलाई ही नहीं, बाहें तक भर जाएंगी।

कोट
16 साल पहले जब मैंने इस अनाथालय का चार्ज लिया था, तभी मैंने शादी न करने का फैसला ले लिया था ताकि वह पूरी ममता उन अनाथ बच्चों को लुटा सकें। मेरी कोशिश होती है कि रक्षाबंधन हो या कोई और पर्व, वह बेटियां खुद को अनाथ होने का एहसास न कर सकें - राम कुमारी तिवारी, अधीक्षिका (काशी अनाथालय)

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