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विश्व पर्यटन के नक्शे पर लमही को उभारने का मार्ग प्रशस्त

Varanasi Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही को विश्व पर्यटन के नक्शे पर उभारने में अब ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से तैयार लीज डीड पर बीएचयू के सहमत न होने से सात साल पुरानी मुंशी प्रेमचंद स्मारक, शोध एवं अध्ययन केंद्र योजना पर अमल का काम लटका था। काफी मशक्कत के बाद लीज डीड में संशोधन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संशोधन पर विधिक राय मिलने के बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बीएचयू के कुलपति को पत्र भेजकर शीघ्र काम शुरू कराने को कहा है। डीड हस्तांतरण पर राज्य सरकार की ओर से नामित विशेष सचिव (संस्कृति) और बीएचयू के उप कुलसचिव (संपदा) शीघ्र हस्ताक्षर करेंगे। इसी के साथ शोधार्थियों, साहित्य प्रेमियों और छात्रों के तीर्थ के रूप में लमही को चमकाने का काम शुरू हो जाएगा।
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लमही को पर्यटन मानचित्र पर लाने की योजना पहली बार वर्ष 2005 में तत्कालीन मुलायम सिंह की सरकार ने बनाई थी। तब गांव में ही स्मारक बनाने के लिए किसानों की .249 हेक्टेयर भूमि अधिगृहीत कर बीएचयू को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन बाद में बैनामे की भाषा पर विश्व विद्यालय प्रशासन ने आपत्ति लगा दी थी। बीएचयू के संपदा विभाग का कहना था कि कुछ शब्दों की वजह से बैनामे की भाषा एक तरफा हो गई है, इसे बदला जाना चाहिए। प्रदेश के संस्कृति विभाग ने विधि विभाग से इस पर राय मांगी थी। अंतत: कानूनी अड़चन दूर कर केंद्र से डीड हस्ताक्षर के लिए अनुरोध कर दिया गया है। केंद्रीय मानव संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव संजीव मित्तल ने कुलपति डा. लालजी सिंह को पत्र भेजकर कहा है कि विधि विभाग से लीज डीड संशोधन प्रक्रिया पूरी करा ली गई है। काम शुरू कराया जाए। कुलपति ने संपदा विभाग को त्वरित कदम उठाने की हिदायत दी है। संपदा विभाग ने शनिवार को इसकी पुष्टि की। उप कुलसचिव नीरज त्रिपाठी के विभागीय दौरे से लौटते ही संस्कृति विभाग से मिलकर डीड हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रेमचंद चूंकि साहित्यकार थे, इसलिए निर्माण की निगरानी का जिम्मा हिंदी विभाग को दिया गया है। इस प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर हिंदी विभाग के प्रोफेसर विजय बहादुर सिंह बनाए गए हैं। स्मारक और शोध संस्थान का निर्माण दो करोड़ रुपये की लागत से कार्यदायी संस्था सीपीडब्ल्यूडी से कराया जाएगा। इसके अलावा लमही में प्रेमचंद सरोवर और प्रेमचंद मार्ग का भी निर्माण कराने की योजना है। वन विभाग सड़कों के किनारे छायादार और शोभाकार पौधे भी लगवाएगा।
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लमही में प्रस्तावित योजनाएं
प्रेमचंद स्मारक
प्रेमचंद शोध एवं अध्ययन केंद्र, प्रेमचंद सरोवर के अलावा गांव को जोड़ने के लिए कथा सम्राट के नाम पर सड़क का निर्माण।
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मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही को ग्लोबलाइज कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। डीड हस्तांतरण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सरोवर, सड़क के अलावा स्मारक और शोध संस्थान खुलने से लमही सांस्कृतिक, साहित्यिक महत्व के एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसति हो जाएगा। -रत्नेश वर्मा, क्षेत्रीय सांस्कृतिक अधिकारी।

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