शहनाई के बाद विश्व फलक पर बनाई पहचान

Varanasi Updated Sat, 28 Jul 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। द्वापर में गोपियों को विरह की आग में सुलगाने वाली कृष्ण की बांसुरी सात समंदर पार की बालाओं को दीवाना बना रही है। यूरोपीय बालाओं के दिल पर बंसी इस कदर राज कायम करेगी, शायद इसका किसी ने अंदाजा भी नहीं लगाया होगा। दुनिया में इस भारतीय वाद्य की लोकप्रियता की वजह इसका सस्ता और आसानी से कहीं भी ले जाना है। बनारस की गलियों से लेकर संगीत घराने के गुरुओं के आंगन तक बांसुरी सीखने के लिए विदेशी बालाओं की भरमार मुरली का सम्मोहन साबित करने के लिए काफी है।
साधना के बल पर कभी चबूतरे से उठ कर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाली शहनाई के बाद बांसुरी दूसरा भारतीय वाद्य है जिसकी सुरीली तान को शास्त्रीय संगीत में बड़े उछाल के रूप में देखा जाएगा। हालांकि बनारस घराने में इस वाद्य को केंद्र में रखने की कोशिश नहीं हुई लेकिन बांसुरी की तरफ दुनिया का रुख मोड़ने के लिए हरि प्रसाद चौरसिया, रोनू मजूमदार और राजेंद्र प्रसन्ना जैसे कलाकारों का नाम जरूर लिया जाएगा। इन दिनों बनारस में दो दर्जन से अधिक विदेशी बालाएं सिर्फ बांसुरी पर अधरों को साधने में पसीना बहा रही हैं। बंगाली टोला में हरि प्रसाद जायसवाल से बांसुरी सीखने वाली विदेशी लड़कियों में कुछ टूर प्रमोटर तो कुछ कर्मचारी हैं। इस्राइल की इफातीमीर, फ्रांस की लिंडा, ताना, जापान की मेगुमी, एरिसा काकिमोतो, बेल्जियम की हेलेन, स्विट्जरलैंड की कोरिन, हालैंड की एन्स बेकनर, जर्मनी की एंद्रिया, मैक्सिको की एलिवेथ, आस्ट्रिया की वेरेना, फिनलैंड की इवा लेटकारी बांसुरी सीख रही हैं।
यूएसए की जेना लास्के तो अब अपने देश में बांसुरी सिखाने के लिए म्यूजिकल स्कूल खोलने की तैयारी कर रही हैं। खालिसपुरा के किशोर सरकार से बांसुरी सीख रहीं साउथ कोरिया की टूर प्रमोटर चोई मुन्यांग ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि बांसुरी कहीं भी लेकर आने, जाने में सबसे आसान वाद्य होने की वजह से भी लड़कियों की दोस्त बन रही है। प्रशिक्षक किशोर बांसुरी में आ रहे उछाल से बेहद उत्साहित हैं। इनका मानना है कि अफ्रीकन वाद्य जंबो के अलावा इटालियन वाद्य वायलिन के साथ बांसुरी के सुर फ्यूजन में भी खूब लग रहे हैं।
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किन देशों की बालाएं ले रही हैं रुचि
इस्राइल, जापान, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, हालैंड, जर्मनी, मैक्सिको, आस्ट्रिया, फिनलैंड, अमेरिका, साउथ कोरिया

प्रसिद्ध बांसुरी वादक
हरि प्रसाद चौरसिया, रोनू मजूमदार और राजेंद्र प्रसन्ना

लोकप्रियता की वजह
बांसुरी को लाने, ले जाने में आसानी और अफ्रीकन वाद्य जंबो तथा इटालियन वाद्य वायलिन के साथ फ्यूजन भी लोकप्रियता का अहम कारण

कोट
दुनिया में ज्यादातर लोग तनाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में कम वजन और कोमल आवाज वाली बांसुरी के प्रति विदेशियों का रुझान बढ़ा है। मैं खुद आधा दर्जन से अधिक विदेशियों को बांसुरी का प्रशिक्षण दे रहा हूं। कीमत में सबसे सस्ता होने की वजह से भी यह पहली पसंद बन रही है।
- हरि प्रसाद पोड्याल, बीएचयू, एमए संगीत विभाग

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