कैंट स्टेशन की सुरक्षा बाबा विश्वनाथ के भरोसे

Varanasi Updated Fri, 27 Jul 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। सात साल पहले 2005 के जुलाई माह में बम विस्फोट की आतंकी घटना और डेढ़ माह पूर्व वाराणसी कैंट स्टेशन को उड़ाने की मिली धमकी के बाद भी यहां की सुरक्षा व्यवस्था नहीं सुधरी। यात्री हाल से लेकर प्लेटफार्मों की निगरानी के लिए लगाए गए 68 सीसीटीवी कैमरों में 58 खराब पड़े हैं। महज दस कैमरे काम कर रहे हैं। दो मेटल डिटेक्टर भी नहीं काम कर रहे हैं। ऐसे में स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था बाबा विश्वनाथ के भरोसे है।
कैंट स्टेशन परिसर में 2005 में हुई बम विस्फोट की घटना में आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत के बाद रेल प्रशासन चेता था। इसके बाद फौरी तौर पर कैंट की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। स्टेशन की प्रत्येक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 68 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे जिनमें 12 मूवी और 56 स्टील थे। पहले तो इनकी देखरेख होती रही लेकिन बाद में रखरखाव के अभाव में बारी-बारी से कैमरे खराब होते गए। मौजूदा समय में 10 ही कैमरे काम कर रहे हैं जिनसे अधिकतर प्लेटफार्मों की निगरानी नहीं हो पा रही है। करीब डेढ़ माह पहले मुरादाबाद में एक रेल अधिकारी को आतंकियों ने पत्र भेज कर बनारस स्टेशन को उड़ाने की धमकी दी थी। इसके बाद रेल महकमे में हड़कंप मचा था। लगातार कई दिनों तक प्लेटफार्मों पर सुरक्षा कर्मियों ने जांच पड़ताल की थी। जीआरपी, आरपीएफ और सिविल पुलिस के अधिकारियों ने भी सुरक्षा का जायजा लिया था। इसके बाद भी खराब कैमरों और प्रवेश द्वारों पर लगे दो मेटल डिटेक्टर दुरुस्त नहीं किए गए। आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त आर एन शर्मा ने बताया कि इस समय केवल दस कैमरे ही काम कर रहे हैं । इनकी रखरखाव की जिम्मेदारी सिग्नल विभाग का है। कई बार चीफ टेली कम्यूनिकेशन इंस्पेक्टर को लिखा गया लेकिन खराब कैमरों को ठीक नहीं किया गया।

गुवाहाटी-ओखा ट्रेन निरस्त
वाराणसी। असम में भड़की जातीय हिंसा के चलते कैंट रेलवे स्टेशन से होकर जाने वाली गुवाहाटी-ओखा (5660) ट्रेन को निरस्त कर दिया गया। इसके चलते यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। अधिकारियों का कहना है कि हिंसा के चलते इस ट्रेन को निरस्त किया गया।

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